भिंड जिले के मेहगांव में आयोजित सरकारी कार्यक्रम “संकल्प से समाधान” शिविर में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला के न पहुंचने पर प्रशासन द्वारा उनके बेटे आलोक शुक्ला को मंच पर मुख्य अतिथि बनाने का मामला विवादों में आ गया है। बिना किसी निर्वाचित पद के आलोक शुक्ला द्वारा हितग्राहियों को योजनाओं के प्रमाण-पत्र बांटने और जनसंपर्क विभाग की प्रेस रिलीज में उन्हें ‘जनप्रतिनिधि’ बताए जाने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अधिकारियों ने ‘जनप्रतिनिधि कोई भी हो सकता है’ कहकर पल्ला झाड़ा है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन खुद मंत्री के बेटे की राजनीतिक लॉन्चिंग कर रहा है।
मंत्री की जगह बेटे ने मंच से बांटे योजनाओं के प्रमाण-पत्र
सोमवार को मेहगांव में आयोजित सरकारी कार्यक्रम “संकल्प से समाधान” शिविर में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। मंत्री की अनुपस्थिति में प्रशासन ने उनके बेटे आलोक शुक्ला को ही मंच पर मुख्य अतिथि बना दिया। इतना ही नहीं, अफसरों ने हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं के प्रमाण-पत्र भी उन्हीं के हाथों से बंटवा दिए। बिना किसी संवैधानिक या निर्वाचित हैसियत के किसी व्यक्ति को यह भूमिका देने पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। जनसंपर्क विभाग ने बताया ‘जनप्रतिनिधि’, अफसरों ने दी सफाई
जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में भी आलोक शुक्ला को “जनप्रतिनिधि” बताया गया है, जबकि वे किसी भी चुनावी प्रक्रिया से निर्वाचित नहीं हैं। इस पर सवाल उठने के बाद कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि “जनप्रतिनिधि तो कोई भी हो सकता है।” अधिकारियों का यह तर्क अब प्रशासनिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आलोक शुक्ला बोले- पिता कैबिनेट मीटिंग में थे, इसलिए मुझे आना पड़ा
इस पूरे विवाद और सरकारी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की कुर्सी पर बैठने को लेकर आलोक शुक्ला ने इसे एक सामान्य स्थिति बताया है। आलोक शुक्ला ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के कारण उनके पिता (मंत्री राकेश शुक्ला) कार्यक्रम में नहीं आ सके, इसलिए उन्हें आना पड़ा। हालांकि, इस तर्क के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी मंच अब निर्वाचित ‘प्रतिनिधि’ की जगह ‘परिवार’ के सदस्यों से भरे जाएंगे। कांग्रेस का आरोप- प्रशासन कर रहा राजनीति में बेटे की लॉन्चिंग
मेहगांव का यह शिविर अब सरकारी योजनाओं के समाधान से ज्यादा व्यवस्था की कार्यप्रणाली और सरकारी प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर बहस छेड़ गया है। इस पूरे मामले पर विरोधी दल के लोगों ने आपत्ति जताना शुरू कर दिया है। वहीं, कांग्रेस पक्ष के लोगों का स्पष्ट रूप से कहना है कि मंत्री की जगह प्रशासन ही उनके बेटे की राजनीति में आधिकारिक तौर पर लॉन्चिंग कर रहा है।


