अपने फैसले से कब-कब पलटा पाकिस्तान ? फिर साबित किया कि नहीं है अपनी ही बात पर टिके रहने की हिम्मत

अपने फैसले से कब-कब पलटा पाकिस्तान ? फिर साबित किया कि नहीं है अपनी ही बात पर टिके रहने की हिम्मत

Champions Trophy: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (Pakistan Cricket Board) का ‘यू-टर्न’ (PCB U-Turn) लेने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्रिकेट जगत में लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद वही हुआ जिसका अनुमान विशेषज्ञ पहले से लगा रहे थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के दबाव और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कड़े रुख के आगे पाकिस्तान को एक बार फिर झुकना पड़ा है। ताजा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान अब अपनी टीम को कोलंबो-श्रीलंका (Colombo Venue) भेजने के लिए राजी हो गया है।

कोलंबो में सजेगा भारत-पाक का मंच (ICC Champions Trophy)

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा कारणों और टीम इंडिया के पाकिस्तान न जाने के फैसले के बाद, आईसीसी ने ‘हाइब्रिड मॉडल’ के तहत कोलंबो को एक न्यूट्रल वेन्यू के तौर पर पेश किया था। शुरू में पीसीबी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए कड़ा विरोध किया था। पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने यहां तक कह दिया था कि “इस बार हम झुकेंगे नहीं और टूर्नामेंट का बहिष्कार करेंगे।” लेकिन अब खबर पक्की है कि पाकिस्तानी टीम कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेलने के लिए तैयार है।

इतिहास गवाह है: कब-कब अपनी बात से पलटा पाकिस्तान?

पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड का इतिहास बयानों से पलटने (Flip-Flop) का रहा है। वे पहले आक्रामक तेवर दिखाते हैं, लेकिन अंत में हकीकत को स्वीकार कर लेते हैं। आइए नजर डालते हैं उनके ऐसे ही कुछ चर्चित यू-टर्न पर:

वनडे वर्ल्ड कप 2023: भारत की मेजबानी में हुए इस टूर्नामेंट से पहले पीसीबी ने धमकी दी थी कि “अगर भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान नहीं आएगा, तो हम वर्ल्ड कप खेलने भारत नहीं जाएंगे।” महीनों तक यह ड्रामा चला, लेकिन अंत में पाकिस्तानी टीम चुपचाप भारत आई और हैदराबाद में उनका भव्य स्वागत भी हुआ।

एशिया कप 2023: तब भी पीसीबी ने हाइब्रिड मॉडल (आधे मैच पाकिस्तान में, आधे बाहर) को मानने से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पूरा टूर्नामेंट पाकिस्तान में ही होगा। लेकिन जब एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने सख्त रुख अपनाया, तो पाकिस्तान को झुकना पड़ा और मुख्य मैच श्रीलंका में हुए।

चैम्पियंस ट्रॉफी विवाद 2025: पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी और पाकिस्तानी अधिकारियों ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि “पाकिस्तान इस बार हाइब्रिड मॉडल स्वीकार नहीं करेगा” और अगर भारत नहीं आया, तो वे टूर्नामेंट का बहिष्कार कर सकते हैं। यह बयानबाजी आईसीसी और बीसीसीआई पर दबाव बनाने के लिए की गई थी।

आखिर बार-बार क्यों झुक जाता है बोर्ड?

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीबी की आर्थिक स्थिति काफी हद तक आईसीसी से मिलने वाले राजस्व (Revenue) पर निर्भर करती है। अगर वे आईसीसी के किसी बड़े टूर्नामेंट का बहिष्कार करते हैं, तो उन पर प्रतिबंध लग सकता है और करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, बीसीसीआई का वैश्विक क्रिकेट में जो वित्तीय और प्रशासनिक दबदबा है, उसके सामने पाकिस्तान की धमकियां अक्सर खोखली साबित होती हैं।

क्रिकेट के फैंस ने लगाई पाकिस्तान की क्लास

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस अपने ही बोर्ड की जम कर क्लास लगा रहे हैं। उनका कहना है कि “अगर अंत में बात माननी ही होती है, तो पहले इतनी बड़ी-बड़ी बातें कर के जग-हंसाई क्यों कराते हो?” पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर रमीज राजा और शोएब अख्तर जैसे दिग्गजों ने भी पहले कई बार बोर्ड की कमजोर कूटनीति (Diplomacy) पर सवाल उठाए हैं।

इस मामले में अब आगे क्या होगा ?

कोलंबो में खेलने की सहमति के बाद, अब आईसीसी जल्द ही नया और आधिकारिक शेड्यूल जारी कर सकता है।

वीजा और सुरक्षा: कोलंबो में पाकिस्तानी खिलाड़ियों, मीडिया और फैंस के लिए वीजा और सुरक्षा इंतजामों पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के साथ बैठकें होंगी।

तैयारी: टीम वहां की परिस्थितियों (Conditions) में ढलने के लिए टूर्नामेंट से एक हफ्ता पहले श्रीलंका पहुंच सकती है।

श्रीलंका की लॉटरी भारत और पाकिस्तान के बीच

जब भी वेन्यू को लेकर विवाद होता है, तो उसका सबसे बड़ा फायदा श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को होता है। कोलंबो एक निष्पक्ष और सस्ता विकल्प बन कर उभरता है। इससे वहां के पर्यटन और क्रिकेट बोर्ड की कमाई में भारी इजाफा होता है। एक बार फिर कोलंबो का प्रेमदासा स्टेडियम हाई-वोल्टेज मैचों का गवाह बनेगा।

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