बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के मेंबर और समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी के पति सायन कुणाल ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा किस्सा शेयर किया जिसने हजारों लोगों का दिल जीत लिया है। दिल्ली से पटना की फ्लाइट में एक अचानक हुई मुलाकात ने सायन को अपने पिता, मशहूर स्वर्गीय IPS ऑफिसर और सोशल वर्कर किशोर कुणाल की यादों और साख से रूबरू कराया, जो आज भी लोगों के जेहन में बसी हैं।
फ्लाइट में पिता के नाम वाले शख्स से मुलाकात
सयान कुणाल ने दिल्ली से लौटने के बाद Facebook पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर की। जिसमें उन्होंने फ्लाइट में अपने बगल में बैठे एक आदमी के बारे में बताया, जिनसे उन्होंने यूं ही बातचीत शुरू कर दी थी। बातचीत के दौरान बिहार का जिक्र आया, और उस आदमी ने बताया कि वह 25 साल पहले बिहार छोड़ चुका है, लेकिन उसकी मिट्टी की खुशबू अभी भी उसके अंदर है। कुछ देर बाद, जब अजनबी ने अपना परिचय देने के लिए अपना कार्ड आगे बढ़ाया, तो सायन एक पल के लिए ठिठक गए। कार्ड पर नाम लिखा था, किशोर कुणाल (डायरेक्टर, KPMG)।
यह मेरे पिता का भी नाम है – सायन कुणाल
जब सायन ने मुस्कुराते हुए अजनबी को बताया कि यह उसके पिता का नाम है, तो जवाब सुनकर सायन गर्व और इमोशन से भर गए। उस आदमी ने बड़े स्नेह से कहा, “शायद आपके पिता का नाम उस जांबाज आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल से प्रेरित होगा, जिनका मैं स्वयं बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं।” सायन के लिए यह क्षण अद्भुत था क्योंकि वह अजनबी यह नहीं जानता था कि वह उसी किशोर कुणाल के बेटे से बात कर रहा है।
पापा, आप सच में अमर हैं – सायन कुणाल
सयान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक अनजान सफर के दौरान, उसने एक अजनबी की बातों में अपने पिता की इज़्ज़त और इमेज देखी। उसने लिखा, “पापा, आप सच में अमर हैं।”
IPS ऑफिसर किशोर कुणाल कौन थे?
किशोर कुणाल बिहार के उन कुछ पुलिस अधिकारियों में से एक थे जिनकी पहचान और काम उनकी मौत के बाद भी घर-घर में मशहूर है। गुजरात कैडर के 1972 बैच के IPS अधिकारी किशोर कुणाल ने सिर्फ 21 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में UPSC पास कर लिया था। पटना में SSP के तौर पर काम करते हुए, उन्हें अपराधियों से निपटने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
2001 में IPS से रिटायर होने के बाद, वे पटना के महावीर मंदिर से जुड़ गए और बिहार धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन भी बने। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और कैंसर अस्पताल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए समाज की सेवा की। उन्होंने पटना में महावीर मंदिर के जरिए कई अस्पतालों की स्थापना की, जहां रोजाना हजारों लोगों का इलाज होता है। वे पटना के मशहूर स्कूल ज्ञान निकेतन के संस्थापक भी हैं। उन्हें कई स्थानों और मंदिरों में दलित पुजारियों की नियुक्ति के लिए भी जाना जाता है।
28 दिसंबर, 2024 को पटना में उनका निधन हो गया, लेकिन सायन की पोस्ट यह साबित करती है कि उनके विचार और क्रेडिबिलिटी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।


