Asha Bhosle – स्वर्गीय आशा भोसले को इंदौर से गहरा लगाव था। यही कारण है कि शहरवासियों के लिए वे आशा ताई थीं। उनके बचपन का कुछ हिस्सा भी यहां बीता था। दिली जुड़ाव की वजह से बाद में भी आशा भोसले इंदौर आती रहीं। उन्हें यहां की मिठाइयां और नमकीन बहुत पसंद था। इंदौर से जुड़ा उनका एक किस्सा खूब कहा-सुना जाता है जब उन्होंने मंच से गाना गाने से मना कर दिया था। मध्यप्रदेश सरकार ने आशा ताई को लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किया था। समारोह में उन्होंने गाना गाने से इंकार कर दिया था। सम्मान समारोह में उन्होंने कुछ गाने गुनगुनाए जरूर लेकिन अपने गीत पेश करने से यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि मैं मेहमान हूं, गाना नहीं गाऊंगी। आशा भोसले ने मजाकिया अंदाज में कहा… कोई घर आए मेहमान को खाना खिलाने के बाद बर्तन भी धुलवाता है क्या?
सेवा प्रकल्प से हुई प्रभावित, भय्यू महाराज को 23 साल पहले दिए थे 25 लाख
आशा ताई का इंदौर से खासा जुड़ाव था। वे गायन के साथ सेवा में भी अग्रणी रहीं। वर्ष 2002- 03 के बीच संत भय्यू महाराज के सेवा कार्य से प्रेरित होकर वे लता मंगेशकर के साथ एमआर-10 स्थित सूर्योदय आश्रम पहुंची थी। आशा ने भय्यू महाराज के प्रकल्पों की तारीफ करते हुए अकोला के पास संचालित मूक बधिरों के स्कूल के लिए 25 लाख रुपए की सहायता राशि दी थी। आयुषी देशमुख ने बताया कि भय्यू महाराज ने जब स्कूल बनवाया तो एक हॉल का नाम मंगेश्कर रखा जहां आज भी बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
भय्यू महाराज जब भी वे मुंबई जाते उनके घर जरूर पहुंचते
भय्यू महाराज का आशा-लता से खूब स्नेह रहा। जब भी वे मुंबई जाते उनके घर जरूर पहुंचते थे। लता मंगेशकर ने भी अकोला के पास चलने वाले वल्र्ड पीस सेंटर के लिए बायलर उपलब्ध करवाए थे।
स्टेज पर कुछ गाने गुनगुनाए लेकिन गीतों की प्रस्तुति देने से इंकार करते हुए कहा मैं मेहमान हूं गाना नहीं गाऊंगी
मप्र शासन संस्कृति विभाग ने लता अलंकरण सम्मान वर्ष 1989-90 में आशा भोसले को दिया था। वे सम्मान लेने इंदौर आई थी। स्टेज पर सवाल जवाब के दौरान कुछ गाने गुनगुनाए लेकिन जब अपने गीतों की प्रस्तुति देने का आयोजकों ने कहा तो आशा ताई ने कहा मैं मेहमान हूं गाना नहीं गाऊंगी। उन्होंने बाद में मजाकिया अंदाज में कहा कि कोई घर आए मेहमान को भोजन कराने के बाद बर्तन भी धुलवाता है क्या और सभी हंस पड़े।


