अच्छी बारिश से गेहूं का रकबा बढ़ा, सरसों-चना पिछड़े

अच्छी बारिश से गेहूं का रकबा बढ़ा, सरसों-चना पिछड़े

रमाकांत दाधीच

जयपुर. रबी सीजन 2025-26 में सांगानेर सहायक निदेशक कृषि के अधीन क्षेत्र सांगानेर, चाकसू, बस्सी, तूंगा, कोटखावदा, माधोराजपुरा और फागी क्षेत्र में इस बार मौसम ने खेती की दिशा बदल दी है। अक्टूबर के आखिर तक हुई लगातार बारिश ने खेतों में नमी बनाए रखी, जिससे गेहूं की बुवाई में किसानों ने अपेक्षा से कहीं अधिक उत्साह दिखाया। गेहूं का रकबा लक्ष्य से करीब 27 फीसदी अधिक दर्ज हुआ और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, यही बारिश सरसों और चने की फसल के लिए चुनौती साबित हुई। खेतों में देर तक नमी रहने से सरसों की बुवाई लक्ष्य से केवल 5 फीसदी ही बढ़ पाई, जबकि चने की फसल बुरी तरह प्रभावित होकर लक्ष्य से लगभग 25 फीसदी कम रही। रबी सीजन 2025-26 में सांगानेर, चाकसू, बस्सी और तूंगा क्षेत्र में किसानों का रुझान गेहूं की ओर अधिक रहा है।

दलहन फसलों का रकबा रहा कमजोर

रिपोर्ट के अनुसार गेहूं का लक्ष्य 20,670 हेक्टेयर था, लेकिन बुवाई 26,357 हेक्टेयर तक पहुंच गई। जौ का लक्ष्य 6,050 हेक्टेयर था, परंतु प्राप्ति 9,358 हेक्टेयर रही। दलहन वर्ग में चना की स्थिति थोड़ी विपरीत रही। चना का लक्ष्य 45,100 हेक्टेयर था, जबकि बुवाई केवल 33,591 हेक्टेयर तक सीमित रही। यानि करीब 25 फीसदी कम रहा। दाले में भी अपेक्षित क्षेत्रफल में नहीं बोई गई।

तिलहन में सरसों आगेतिलहन वर्ग में सरसों का प्रदर्शन ही शानदार रहा। सरसों बुवाई का लक्ष्य 28,450 हेक्टेयर था, जबकि बुवाई 29,994 हेक्टेयर दर्ज की गई। तारामीरा 2,710 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,008 हेक्टेयर में बुवाई हुई। मैथी, प्याज और अन्य सब्जियों का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम रहा, जबकि हरे चारे की बुवाई 2,121 हेक्टेयर तक पहुंची।

दलहन की कमी चिंता का विषयविशेषज्ञों का मानना है कि गेहूं और सरसों की बुवाई में वृद्धि से खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। वहीं दलहन की कमी चिंता का विषय है, क्योंकि इससे बाजार में चना और अन्य दालों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।फागी में चना-सरसों मजबूत, 50 फीसदी अधिक बुवाई

फागी क्षेत्र में हर बार चने की फसल अधिक बोई जाती है। इस बार 9 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 13544 हेक्टेयर में चना बुवाई हुई है। वहीं सरसों 5 हजार लक्ष्य के बजाय 10454 हेक्टेयर में बुवाई हुई है। यहां गेहूं का रकबा करीब 60 फीसदी घट गया। 3 हजार हेक्टेयर के बजाय यहां 1205 हेक्टेयर में गेहूं बुवाई हुई है।

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