‘विधाता जो तय करता है, वही होता है’… मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला, वसुंधरा राजे को लेकर दिए बयान पर मदन राठौड़ ने दी सफाई

‘विधाता जो तय करता है, वही होता है’… मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला, वसुंधरा राजे को लेकर दिए बयान पर मदन राठौड़ ने दी सफाई

जोधपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को लेकर बीकानेर में दिए अपने बयान पर जोधपुर में सफाई दी। राठौड़ ने कहा, उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। जबकि उनके दोहे का मतलब यह है कि विधाता जो तय करता है, वही होता है। विधाता ही सबको जिम्मेदारी देता है। हमसे क्यों झगड़ा करते हो, विधाता से करो, उससे प्रार्थना करो। ये अर्थ था, लेकिन लोग नहीं समझ पाते हैं तो क्या करें। राठौड़ ने कहा कि काम सब अच्छे करते हैं, लेकिन किसको कब कहां जिम्मेदारी मिल जाए। सब ऊपर से तय होता है। इसका मतलब होता है ऊपर से निर्देशित होता है।

कार्यकर्ता कभी ‘पूर्व’ नहीं होता

जोधपुर में मीडिया से बातचीत में राठौड़ ने कहा कि पार्टी में कोई भी कार्यकर्ता कभी ‘पूर्व’ नहीं होता, बल्कि सभी कार्यकर्ता संगठन की मजबूती के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। भाजपा में गुटबाजी को नकारते हुए राठौड़ ने कहा, हम सब एक हैं और समझ के साथ काम करते हैं। उन्होंने कहा, वसुंधराजी से कल भी बात हुई थी। हम सभी समन्वय से काम कर रहे हैं। हमारा कार्यकर्ता सिपाही की तरह काम करता है। जिस मोर्चे पर भेज दिया जाए, वहां कार्यकर्ता अपना दायित्व निभाता है।

रिफाइनरी शुरू होगी तो, 90 हजार को मिलेगा रोजगार

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि पचपदरा में रिफाइनरी परियोजना राजस्थान के लिए एक बड़ा तोहफा है। राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी को लटकाए रखा। लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद रिफाइनरी के काम में तेजी आई। जब रिफाइनरी शुरू होगी तो उससे करीब 90 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

भाजपा ने दिया आंबेडकर को सम्मान

राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को कभी आगे नहीं आने दिया। नेहरूजी ने उनके सामने उम्मीदवार खड़ा करवा दिए, ताकि वे चुनाव जीतकर सदन में नहीं पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आंबेडकर को सम्मान दिया। पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से ही आंबेडकर के जन्म स्थान से लेकर शिक्षा प्राप्त करने वाले स्थलों पर स्मारक बनवाया। इसके अलावा, विदेश में जहां उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, उस भवन को खरीदकर वहां स्मारक के रूप में विकसित किया गया।

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