आपकी बात: जंगलों की निगरानी करने के लिए किस तरह के विशेष कदम उठाए जाने की जरूरत है?

आपकी बात: जंगलों की निगरानी करने के लिए किस तरह के विशेष कदम उठाए जाने की जरूरत है?

तकनीक और जमीनी गश्त का मजबूत तालमेल

जंगलों की प्रभावी निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग समय की जरूरत है। सैटेलाइट डेटा, एआइ आधारित कैमरा ट्रैप और ड्रोन के माध्यम से दूर-दराज के वन क्षेत्रों पर भी लगातार नजर रखी जा सकती है। इससे अवैध कटाई, शिकार और संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता चलता है। लेकिन तकनीक के साथ-साथ फील्ड पेट्रोलिंग भी उतनी ही जरूरी है। जंगल की आग से बचाव के लिए फायर अलार्म सिस्टम और त्वरित सूचना तंत्र विकसित करना चाहिए। – योगेश स्वामी, सूरतगढ़

पारिस्थितिकी संतुलन के लिए उन्नत निगरानी तंत्र

जंगल पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। जलवायु संतुलन, जल स्रोतों की निरंतरता और मिट्टी की उर्वरता सीधे तौर पर वनों पर निर्भर करती है। इसलिए सैटेलाइट इमेज, ड्रोन सर्विलांस, जीआइएस मैपिंग और सेंसर आधारित निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना आवश्यक है। रियल टाइम डेटा से वन विभाग को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलती है। स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की पारंपरिक समझ का लाभ उठाकर निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सकता है। – डॉ. नयन प्रकाश गांधी, कोटा

सख्त कानून और सामुदायिक सहयोग जरूरी

जंगलों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी और सेंसर लगाए जाने चाहिए। वन रक्षकों की नियमित गश्त से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। स्थानीय ग्राम समितियों और नागरिकों को निगरानी प्रक्रिया से जोड़ना भी प्रभावी कदम है। अवैध कटाई और शिकार पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना होना चाहिए। इन उपायों से वन क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। – रविन्द्र वर्मा, रतलाम

स्थानीय सहभागिता से मजबूत संरक्षण

वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका बेहद अहम है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों के निवासी खतरों को सबसे पहले पहचान सकते हैं, इसलिए उन्हें निगरानी कार्य में शामिल किया जाना चाहिए। वन अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा कर वृक्षों की स्थिति और संख्या की समीक्षा करनी चाहिए। कीट और रोगों के प्रसार को रोकने के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाना भी जरूरी है। – पूजा दीपू पाटीदार

जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका पर जोर

जंगलों को बचाने के लिए सख्त कानून बनाना और उनका ईमानदारी से पालन कराना आवश्यक है। लेकिन केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। लोगों में जंगलों के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना भी उतना ही जरूरी है। वृक्षारोपण संरक्षण का एक हिस्सा है, पर असली चुनौती मौजूदा वनों को सुरक्षित रखना है। स्थानीय समुदायों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल कर उन्हें प्रशिक्षण और वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे वनों के संरक्षक के रूप में सक्रिय भूमिका निभा सकें। – प्रवेश भूतड़ा, सूरत

कैमरा ट्रैप प्रभावी माध्यम

जैव विविधता की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप प्रभावी माध्यम हैं। वृक्षों की नियमित गिनती और कड़े कानूनों का पालन भी जरूरी है। इसके साथ ही हेलीकॉप्टर या विशेष गश्त के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा सकती है। ग्राउंड पेट्रोलिंग को मजबूत कर अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए। – दीपू पाटीदार, झालावाड़

कानून का पालन और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत

जंगलों की निगरानी में सबसे पहली आवश्यकता वन कानूनों के सख्त पालन की है। त्वरित कार्रवाई से ही संदेश जाएगा कि नियमों से समझौता नहीं होगा। रात्रि गश्त के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। वन कर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ उनका नियमित प्रशिक्षण भी जरूरी है। यदि कर्मचारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें, तो वन क्षेत्र की सुरक्षा अधिक मजबूत हो सकती है। – अमृतलाल मारू, इन्दौर

जनजागरूकता और सख्ती से ही बचेगा वन क्षेत्र

वन विभाग की नियमित गश्त और कानून का कड़ाई से पालन आवश्यक है। हरे वृक्षों की कटाई पर सख्त दंड का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन से जोड़कर संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। जनजागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों में यह समझ विकसित करनी होगी कि जंगलों की सुरक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है। – सुभाष सिद्ध बाना, बीकानेर

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