क्या है Wilson Disease? प्रियंका चोपड़ा के करीबी की मौत के बाद चर्चा में आई दुर्लभ बीमारी, जानिए इसके लक्षण और खतरे

क्या है Wilson Disease? प्रियंका चोपड़ा के करीबी की मौत के बाद चर्चा में आई दुर्लभ बीमारी, जानिए इसके लक्षण और खतरे

Wilson Disease Symptoms: हाल ही में प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस की करीबी दोस्त और बचपन की साथी माया किब्बेल के निधन की खबर ने लोगों को झकझोर दिया। 30 साल की उम्र में उनकी मौत एक दुर्लभ बीमारी विल्सन डिजीज (Wilson’s Disease) की वजह से हुई। इस घटना के बाद यह बीमारी फिर से चर्चा में आ गई है। हालांकि यह बीमारी बहुत दुर्लभ है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता होना जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

क्या होती है विल्सन डिजीज

विल्सन डिजीज एक जेनेटिक यानी आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर से अतिरिक्त कॉपर (तांबा) बाहर नहीं निकल पाता। सामान्य स्थिति में हमारा लिवर अतिरिक्त कॉपर को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन इस बीमारी में जीन में गड़बड़ी के कारण कॉपर शरीर में जमा होने लगता है। धीरे-धीरे यह कॉपर लिवर, दिमाग और आंखों में इकट्ठा होने लगता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।

कितनी दुर्लभ है यह बीमारी

दुनिया भर में यह बीमारी लगभग 30 से 40 हजार लोगों में से एक व्यक्ति को होती है। भारत में भी इसके मामले बहुत कम सामने आते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार सही जांच न होने के कारण इसके कई केस सामने ही नहीं आ पाते।

बीमारी के प्रमुख लक्षण

विल्सन डिजीज के लक्षण कई बार सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

आंखों में खास निशान: इस बीमारी का एक खास संकेत केसर-फ्लेशर रिंग (Kayser-Fleischer Ring) होता है। इसमें आंख की पुतली के किनारे पर भूरा या जंग जैसा रंग दिखाई देता है, जो कॉपर जमा होने की वजह से होता है।

लिवर से जुड़ी समस्याएं: मरीज को पीलिया, बहुत ज्यादा थकान, पेट या पैरों में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

दिमाग और नसों से जुड़ी दिक्कतें: हाथों में कंपन, मांसपेशियों में जकड़न, बोलने या निगलने में परेशानी भी हो सकती है।

मानसिक बदलाव: कुछ लोगों में अचानक चिंता, डिप्रेशन या मूड में बदलाव भी देखने को मिलता है।

भारत में क्यों बढ़ जाता है जोखिम

भारत में कुछ जगहों पर करीबी रिश्तों में शादी (कजिन मैरिज) की परंपरा होने के कारण यह बीमारी थोड़ा ज्यादा देखने को मिल सकती है। इसके अलावा जागरूकता की कमी के कारण कई मरीजों में बीमारी का पता देर से चलता है। कई बार डॉक्टर इसे हेपेटाइटिस या सामान्य न्यूरोलॉजिकल समस्या समझ लेते हैं।

इलाज कैसे होता है

इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन इलाज जीवनभर करना पड़ता है। डॉक्टर ऐसी दवाएं देते हैं जो शरीर से अतिरिक्त कॉपर को बाहर निकालने में मदद करती हैं। कुछ मामलों में जिंक की दवाएं दी जाती हैं ताकि शरीर भोजन से ज्यादा कॉपर न सोखे। अगर बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ जाए और लिवर खराब हो जाए तो लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ सकती है।

समय पर पहचान है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लिवर की समस्या, हाथों में कंपन या आंखों में असामान्य रिंग जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। विल्सन डिजीज भले ही दुर्लभ हो, लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसलिए जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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