West Asia Crisis: निर्यातकों की बढ़ी मुश्किल, व्यापार मंडल ने RBI गवर्नर से लगाई राहत की गुहार

West Asia Crisis: निर्यातकों की बढ़ी मुश्किल, व्यापार मंडल ने RBI गवर्नर से लगाई राहत की गुहार

भारत वाणिज्य मंडल (बीसीसी) ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं शिपिंग मार्गों में व्यवधान से प्रभावित निर्यातकों के लिए सहायक बैंकिंग उपायों की मांग की है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा को सोमवार को लिखे पत्र में मंडल ने कहा कि पश्चिम एशिया न केवल भारतीय निर्यात का एक प्रमुख गंतव्य है, बल्कि यूरोप व अफ्रीका जाने वाले माल के लिए एक महत्वपूर्ण ‘ट्रांस-शिपमेंट’ (माल आवाजाही) केंद्र भी है।
पत्र में कहा गया ‘‘ मौजूदा स्थिति के कारण जहाजों के मार्ग बदल रहे हैं, बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ रही है, माल भाड़ा एवं बीमा लागत बढ़ गई है तथा परिवहन अवधि लंबी हो गई है जिससे निर्यातकों की कार्यशील पूंजी तथा नकदी स्थिति पर दबाव पड़ा है।’’

बीसीसी ने आरबीआई से आग्रह किया कि वह बैंकों को कार्यशील पूंजी सीमा बढ़ाकर, तदर्थ ऋण सुविधाएं प्रदान करके और शिपमेंट से पहले व बाद में निर्यात ऋण की अवधि बढ़ाकर एक सहायक ऋण दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करे।
इसके अलावा, ‘पैकिंग क्रेडिट’ के नवीनीकरण में अधिक लचीलापन और निर्यात बिल की देय तिथियों को बढ़ाने की भी मांग की गई है।
मंडल ने यह भी अनुरोध किया कि ऋण अदायगी पर स्थगन अवधि को 2026 की पहली और दूसरी तिमाही तक बढ़ाया जाए, ताकि लॉजिस्टिक्स व्यवधान झेल रहे निर्यात क्षेत्रों को राहत मिल सके।

साथ ही, यह भी कहा गया कि शिपिंग में देरी के कारण होने वाली भुगतान देरी पर निर्यातकों को दंडात्मक ब्याज से बचाने और ब्याज समानीकरण योजना (आईईएस) के लाभों की सुरक्षा के लिए नियामकीय राहत दी जाए।
बीसीसी ने परिवहन अवधि के नियमों पर मांग की कि उधार अवधि वाले निर्यात बिल के लिए अनुमत समय को ‘‘ सामान्य परिवहन अवधि + 25 दिन’’ से बढ़ाकर ‘‘+ 60 दिन ’’ किया जाए विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए समानता सुनिश्चित करने हेतु।

अनिश्चित शिपमेंट समयसीमा के बीच निर्यात वित्तपोषण को सुचारु बनाए रखने के लिए ‘बिल डिस्काउंटिंग’ सुविधाओं में अधिक स्पष्टता और मजबूती लाने की भी मांग की गई।
भारत वाणिज्य मंडल (बीसीसी) के अध्यक्ष के नरेश पचीसिया ने कहा कि नाशवंत (जल्द खराब होने वाले) और मौसमी फैशन उत्पादों से जुड़े निर्यातक विशेष रूप से प्रभावित हैं, क्योंकि शिपमेंट में देरी होने पर मौसमी मांग का समय निकल जाने से माल का मूल्य घट सकता है।

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