West Asia Crisis: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जंग के कारण मिडिल ईस्ट (West Asia Crisis) में हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए हैं। युद्ध के इस माहौल और एयरस्पेस बंद होने के कारण खाड़ी देशों में हजारों भारतीय नागरिक और कामगार (Indians Stranded) फंस गए हैं। इस संकट के मद्देनजर भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए मुहिम शुरू कर दी है। मीडिया व नागरिक उड्डयन मंत्रालयों से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट्स के आधार पर रैस्क्यू मिशन का खाका तैयार किया जा रहा है।
कब और कितने विमान पहुंचेंगे भारत ? (Evacuation Flights)
वर्तमान में ईरान, इजरायल और आसपास के देशों का एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) कॉमर्शियल विमानों के लिए अनिश्चितकाल के लिए बंद है। इसके चलते 350 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, निकासी उड़ानों (Evacuation Flights) की सटीक तारीख और विमानों की संख्या की घोषणा अभी नहीं की गई है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सुरक्षित हवाई मार्ग (Safe Corridor) की मंजूरी मिलेगी, एयर इंडिया और भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों का शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। फिलहाल खाड़ी देशों से आने वाले विमानों को ओमान के दक्षिणी हिस्से से लंबा रूट लेकर संचालित करने पर विचार किया जा रहा है। अभी तक किसी भी रैस्क्यू या कामर्शियल विमान के भारत पहुंचने की कोई तारीख या समय आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुआ है।
मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस हाई-रिस्क ज़ोन (Middle East Conflict)
मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस हाई-रिस्क ज़ोन होने के कारण पूरी तरह बंद है। एयर इंडिया और इंडिगो ने अपनी सभी उड़ानें 2 मार्च रात 11:59 बजे तक सस्पेंड कर रखी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय दूतावास हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से ‘सेफ कॉरिडोर’ (सुरक्षित हवाई मार्ग) की गारंटी नहीं मिलती, तब तक किसी भी रैस्क्यू या विशेष विमान के भारत पहुंचने की तारीख और समय निर्धारित नहीं किया जा सकता।”
- निवासी/कार्यरत भारतीय (diaspora/workers) — जो वहाँ रहते हैं और वर्तमान स्थिति में सुरक्षित निकासी मुश्किल है।
- पर्यटक/ट्रांजिट यात्री/छात्र — जो फ्लाइट कैंसिलेशन और एयरस्पेस बंद होने से अटके हैं।
किस देश में फंसे कितने भारतीय (मुख्य रूप से निवासी/कार्यरत और फंसे यात्री)
वर्तमान संकट (Iran-US-Israel conflict) के कारण West Asia/Middle East में कुल 9.6 मिलियन से 10 मिलियन भारतीय फंसे/प्रभावित हैं (ज्यादातर खाड़ी देशों में)। ये आंकड़े MEA, न्यूज रिपोर्ट्स और सरकार के बयानों पर आधारित हैं।
| देश/क्षेत्र | भारतीयों की संख्या (लगभग) | स्थिति/टिप्पणी |
|---|---|---|
| कुल West Asia (खाड़ी + अन्य) | 9.6 मिलियन – 10 मिलियन | मुख्य रूप से कार्यरत; एयरस्पेस बंद होने से निकासी मुश्किल, कोई बड़ा evacuation प्लान नहीं |
| UAE (दुबई/अबू धाबी) | 3.5 मिलियन+ (सबसे ज्यादा) | हजारों पर्यटक/ट्रांजिट यात्री फंसे; 100+ कर्नाटक/मध्य प्रदेश के लोग अटके |
| सऊदी अरब | 2.5-3 मिलियन (अनुमानित) | बड़ा भारतीय समुदाय; फ्लाइट प्रभावित |
| कतर | 700,000+ | एयरपोर्ट/एयरस्पेस बंद; पर्यटक प्रभावित |
| कुवैत | 1 मिलियन+ | भारतीय दूतावास मदद कर रहा; स्ट्रैंडेड यात्री |
| बहरीन, ओमान आदि | लाखों में कुल | छोटे लेकिन प्रभावित समुदाय |
| इजरायल | हजारों (सटीक संख्या कम उपलब्ध) | लैंड रूट से जॉर्डन जा सकते हैं; कोई बड़ा स्ट्रैंडेड रिपोर्ट नहीं |
| ईरान | 9,000-10,000 (जिनमें 3,000 छात्र) | 1,200+ कश्मीरी छात्र फंसे; evacuation अपील |
| अमेरिका | कोई बड़ी संख्या फंसी नहीं रिपोर्ट | संकट मिडिल ईस्ट में; USA में सामान्य स्थिति |
खाड़ी देशों की सूची (Gulf Cooperation Council – GCC): UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान। इनमें कुल 9+ मिलियन भारतीय रहते हैं, और वर्तमान युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
किस देश में फंसे कितने भारतीय पर्यटक
यह मुख्य रूप से ट्रांजिट/टूरिस्ट हैं जो फ्लाइट कैंसिलेशन से अटके हैं (संख्या हजारों में, सटीक आंकड़े बदलते रहते हैं)।
| देश/क्षेत्र | भारतीय पर्यटक/यात्री फंसे (लगभग) | स्थिति/टिप्पणी |
|---|---|---|
| अमेरिका | कोई बड़ी संख्या रिपोर्ट नहीं | कोई विशेष संकट नहीं; सामान्य यात्रा प्रभावित नहीं |
| इजरायल | सीमित (कुछ सैकड़ों) | लैंड रूट से निकासी संभव; भारत मदद की योजना |
| UAE (दुबई मुख्य) | सैकड़ों-हजारों (700+ मध्य प्रदेश से, 84 पुणे छात्र, 100+ कर्नाटक से) | एयरपोर्ट बंद; होटल में ठहरे; दूतावास संपर्क में |
| अन्य खाड़ी देश (कतर, कुवैत, बहरीन) | सैकड़ों-हजारों | एयरस्पेस बंद; 350+ भारतीय फ्लाइट्स प्रभावित; कुल हजारों यात्री अटके |
| कुल पर्यटक/ट्रांजिट | हजारों (60,000+ कुल प्रभावित यात्री अनुमान) | मुख्य रूप से दुबई/दोहा हब पर; सरकार हेल्पलाइन जारी कर रही |
भारत सरकार और मंत्रालयों का एक्शन प्लान
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों (UAE, ओमान आदि) में स्थित भारतीय दूतावासों ने 24×7 हेल्पलाइन स्थापित की है। नागरिकों से सुरक्षित बंकरों में रहने और दूतावास के सीधे संपर्क में रहने की अपील की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक ‘पैसेंजर असिस्टेंस कंट्रोल रूम’ बनाया है। एयरलाइंस को निर्देश दिए गए हैं कि वे फंसे हुए यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट रीशेड्यूल या फुल रिफंड की सुविधा दें। वहीं दुबई, मस्कट और रियाद जैसे ट्रांजिट हब पर फंसे भारतीयों के लिए स्थानीय दूतावास ठहरने और भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
विमानों के न आने का तथ्यात्मक कारण (2 मार्च 2026 के लेटेस्ट अपडेट्स)
उड़ानें आधिकारिक तौर पर सस्पेंड: एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, ओमान) और इजरायल के लिए अपनी सभी उड़ानें आज रात (2 मार्च) 11:59 बजे तक के लिए पूरी तरह सस्पेंड कर दी हैं।
350 से ज्यादा उड़ानें रद्द: नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के अनुसार, ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के कारण एयरस्पेस बंद होने से आज (2 मार्च) 350 से अधिक भारतीय उड़ानें रद्द की गई हैं।
वैकल्पिक मार्ग की तलाश: एयरस्पेस सुरक्षित न होने के कारण सीधा एयरलिफ्ट फिलहाल संभव नहीं है। कुछ फंसे हुए भारतीय सड़क मार्ग से UAE से मस्कट (ओमान) पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वहां से वापसी की जा सके।
अमेरिका और इजरायल का कूटनीतिक और विमानन प्रबंधन
अमेरिका का पूरा फोकस अपने सैन्य ऑपरेशन्स और नागरिकों की सुरक्षा पर है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट के लिए ‘डू नॉट ट्रैवल’ की सख्त एडवाइजरी जारी की है। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास भी अपने नागरिकों को इस क्षेत्र से यात्रा न करने की हिदायत दे रहा है।
इजरायल की ओर से प्रबंधन
इजरायल ने अपना एयरस्पेस पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों और आपातकालीन उड़ानों के लिए आरक्षित कर लिया है। नागरिक उड़ानें पूरी तरह ठप हैं। भारत में इजराइली दूतावास भारत सरकार के लगातार संपर्क में है, ताकि हालात थोड़े सामान्य होने पर दोनों देशों के बीच रुके हुए विमानों के लिए सुरक्षित रूट तय किया जा सके।
खाड़ी देशों से उड़ानों की वर्तमान स्थिति
दुबई, शारजाह और रियाद एयरपोर्ट्स पर इस वक्त हजारों भारतीय यात्री फंसे हुए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) खाड़ी देशों के एविएशन अथॉरिटीज के साथ लगातार संपर्क में है। जब तक एयरस्पेस पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं होता, तब तक सामूहिक एयरलिफ्ट संभव नहीं है। सरकार ग्राउंड लेवल पर फंसे हुए लोगों का डेटाबेस तैयार कर रही है, ताकि उड़ानें शुरू होते ही सबसे पहले बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों को निकाला जा सके।


