स्वास्थ्य विभाग-स्मार्ट सिटी की खींचतान में फंसे वेलनेस सेंटर

स्वास्थ्य विभाग-स्मार्ट सिटी की खींचतान में फंसे वेलनेस सेंटर

आम आदमी की सेहत से जुड़ी एक बड़ी योजना फाइलों और आपसी खींचतान में दब गई है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के 20 जनसेवा केंद्रों को अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तौर पर विकसित करना था, लेकिन यह साल बीतने को है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो सका है। स्मार्ट सिटी और सिविल सर्जन कार्यालय के बीच जारी लेटर वॉर ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अधर में लटका दिया है। सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी ने अबतक जो 10 भवन सौंपे हैं, उनकी स्थिति बेहद दयनीय है। शीशे टूटे हैं, बाथरूम मेंटेन नहीं हैं और फर्नीचर खस्ताहाल हैं। समझौता था कि स्मार्ट सिटी पूरी तरह सुसज्जित भवन सौंपेगी, लेकिन वर्तमान स्थिति में इन केंद्रों पर इलाज शुरू करना संभव नहीं है। जब तक मरम्मत और मेंटेनेंस का काम पूरा नहीं होता, विभाग इन्हें स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। स्मार्ट सिटी पर मढ़ा दोष, पर अपनी भी तैयारी नहीं : हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी तैयारी अधूरी है। 20 केंद्रों के लिए एक-एक जनरल फिजिशियन (डॉक्टर) की नियुक्ति छह माह पहले ही कर दी गई है, लेकिन अस्पताल चलाने के लिए अन्य संसाधन नदारद हैं। अभी तक नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ और सफाईकर्मियों की नियुक्ति नहीं हुई है। केंद्रों पर न तो जांच मशीनें पहुंची हैं और न ही दवाओं का स्टॉक। सिविल सर्जन के अनुसार, विभाग को मैनपावर के लिए पत्र लिखा गया है। इसकी प्रक्रिया जारी है। ​दिसंबर 2024 में ही इन सेंटरों को चालू करना था। इन सेंटरों में मिलेंगी ये सुविधाएं आम आदमी की सेहत से जुड़ी एक बड़ी योजना फाइलों और आपसी खींचतान में दब गई है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के 20 जनसेवा केंद्रों को अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तौर पर विकसित करना था, लेकिन यह साल बीतने को है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो सका है। स्मार्ट सिटी और सिविल सर्जन कार्यालय के बीच जारी लेटर वॉर ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अधर में लटका दिया है। सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी ने अबतक जो 10 भवन सौंपे हैं, उनकी स्थिति बेहद दयनीय है। शीशे टूटे हैं, बाथरूम मेंटेन नहीं हैं और फर्नीचर खस्ताहाल हैं। समझौता था कि स्मार्ट सिटी पूरी तरह सुसज्जित भवन सौंपेगी, लेकिन वर्तमान स्थिति में इन केंद्रों पर इलाज शुरू करना संभव नहीं है। जब तक मरम्मत और मेंटेनेंस का काम पूरा नहीं होता, विभाग इन्हें स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। स्मार्ट सिटी पर मढ़ा दोष, पर अपनी भी तैयारी नहीं : हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी तैयारी अधूरी है। 20 केंद्रों के लिए एक-एक जनरल फिजिशियन (डॉक्टर) की नियुक्ति छह माह पहले ही कर दी गई है, लेकिन अस्पताल चलाने के लिए अन्य संसाधन नदारद हैं। अभी तक नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ और सफाईकर्मियों की नियुक्ति नहीं हुई है। केंद्रों पर न तो जांच मशीनें पहुंची हैं और न ही दवाओं का स्टॉक। सिविल सर्जन के अनुसार, विभाग को मैनपावर के लिए पत्र लिखा गया है। इसकी प्रक्रिया जारी है। ​दिसंबर 2024 में ही इन सेंटरों को चालू करना था। इन सेंटरों में मिलेंगी ये सुविधाएं  

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