Weight Loss Injections: सस्ते हो सकते हैं वज़न घटाने वाले इंजेक्शन, लेकिन सरकार ने क्यों जारी किया अलर्ट

Weight Loss Injections: सस्ते हो सकते हैं वज़न घटाने वाले इंजेक्शन, लेकिन सरकार ने क्यों जारी किया अलर्ट

Weight Loss Injections: सस्ते हो सकते हैं वज़न घटाने वाले इंजेक्शन, लेकिन सरकार ने क्यों जारी किया अलर्ट वजन कम करने वाले इंजेक्शन पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। अब भारत में भी इन दवाओं की कीमतें काफी कम हो सकती हैं, क्योंकि मोटापा और डायबिटीज़ के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) दवा का पेटेंट समाप्त हो गया है। इस दवा का इस्तेमाल वज़न घटाने वाले इंजेक्शन जैसे Ozempic और Wegovy में किया जाता है।

पेटेंट खत्म होने का मतलब यह है कि अब केवल मूल कंपनी ही नहीं, बल्कि दूसरी दवा कंपनियां भी इसका जेनेरिक संस्करण बना सकती हैं। इससे बाजार में काम्पिटिशन बढ़ेगा और कीमतें कम होने की संभावना है। पहले इस इंजेक्शन को लगाने का एक महीने का खर्च10 से 15 हजार रुपए तक था जो अब घटकर 5 हज़ार तक आ सकता है।

अब भारत की कई बड़ी कंपनियां—जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज़, ज़ायडस और अन्य—इस दवा के अपने-अपने संस्करण बाजार में ला रही हैं।

हालांकि जैसे-जैसे इन दवाओं की उपलब्धता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इनके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। भारत सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।

सरकार की सख्ती: भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई

भारत के दवा नियामक Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) ने हाल ही में GLP-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं के प्रचार और बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी है। 10 मार्च को सरकार ने एडवाइज़री जारी की। नियामक एजेंसियों को आशंका है कि कई जगहों पर इन इंजेक्शनों को “फैट-लॉस शॉट” या “स्लिमिंग इंजेक्शन” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह गंभीर मेडिकल कंडीशन—जैसे डायबिटीज़ और मोटापा—के इलाज की दवाएं हैं।

सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि ये दवा केवल प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिले। सरकार का कहना है कि इन दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है। इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन, क्लीनिक और फार्मेसी पर नजर रखें और भ्रामक विज्ञापन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। अभी तक 49 ऐसी जगहों की जांच की जा चुकी है।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

इस दवा के इस्तेमाल के बारे में Fat Loss Expert डॉ. सारिका श्रीवास्तव का कहना है, ‘वजन कम करने की दवाएं इस दशक का चमत्कार हैं – पहले हम कई मरीजों के मामले में उनका वजन कम करने में असहाय महसूस करते थे लेकिन अब हमारे लिए इलाज करना आसान हो गया है| मोटापा अपने आप में कई बीमारियों को दावत देता है – इसलिए अगर हम सावधानी से इस दवा का इस्तेमाल करें तो कई मरीजों को बहुत मदद मिल सकती है। डॉ की सलाह से इस दवा को लें तो डरने की कोई बात नहीं है।“

AIIMS के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निखिल टंडन के अनुसार, अभी इन दवाओं के लंबे समय के असर को लेकर कई सवाल बाकी हैं। उनका कहना है कि “इन दवाओं के परिणामों को लेकर अभी ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दी होगा, क्योंकि इलाज बंद होने के बाद वजन दोबारा बढ़ने की संभावना भी हो सकती है।”

तेजी से बढ़ रहा है फैटलॉस इंजेक्शन का बाजार

भारत में फैट-लॉस इंजेक्शन का बाजार अभी छोटा है, लेकिन ये सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार है। 2024 में जहां इन दवाओं की बिक्री करीब ₹571 करोड़ थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर ₹1,230 करोड़ तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पेटेंट खत्म होने और सस्ती जेनेरिक दवाओं के आने के बाद अगले कुछ वर्षों में यह बाजार ₹12,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।”

वजन कम करने वाले इंजेक्शन वैसे तो बहुत सारे हैं लेकिन बाजार में अचानक आई क्रांति के पीछे दो प्रमुख सॉल्ट हैं। पहला है Semaglutide – जिसका पेटेंट 20 मार्च को खत्म हुआ है। और दूसरा सॉल्ट है – Tirzepatide इस सॉल्ट से मुंजारो ब्रांड का इजेक्शन बन रहा है।

2025 के आंकड़ों के अनुसार:

  • Mounjaro (tirzepatide) – लॉन्च के 9 महीनों में लगभग 601 करोड़ की बिक्री
  • Wegovy (semaglutide) – लगभग 61 करोड़ की बिक्री
  • Ozempic(semaglutide) लॉन्च के शुरुआती महीनों में लगभग 1 करोड़ की बिक्री

कई निजी अस्पतालों और वेलनेस क्लीनिक्स ने अब वेटमैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं, जहां इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि इसे “जादुई इलाज” समझना गलत होगा।

वजन कम करने के “जादुई इंजेक्शन” कैसे काम करते हैं – जानिए

जिस श्रेणी की दवाओं की इतनी चर्चा हो रही है, उन्हें GLP-1 drugs कहा जाता है। GLP-1 का पूरा नाम ग्लूकाजेन लाइक पेप्टाइड (Glucagon-Like Peptide-1) है। यह शरीर में बनने वाला एक नेचुरल हार्मोन है, जो खाने के बाद अपने आप एक्टिव हो जाता है और पाचन तथा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

जब हम खाना खाते हैं तो यह हार्मोन दिमाग को संकेत देता है कि पेट भर गया है। इससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम खाना खाता है। इसके अलावा यह पेट से भोजन के निकलने की गति को भी धीमा कर देता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।

GLP-1 आधारित दवाएं इसी हार्मोन की नकल करती हैं। ये दवाएं शरीर में GLP-1 की तरह काम करके भूख कम करती हैं, इंसुलिन के असर को बेहतर बनाती हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इसी कारण इनका इस्तेमाल पहले डायबिटीज़ के इलाज में किया गया, लेकिन बाद में पाया गया कि इससे वजन भी कम होता है।

फैट लॉस इंजेक्शन से जुड़े खतरे

हालांकि इन इंजेक्शनों से कई मरीजों को फायदा मिला है, लेकिन इनके साइड-इफेक्ट भी हो सकते हैं। कुछ लोगों में मतली, उल्टी, पेट दर्द, कब्ज या डायरिया जैसी समस्याएं देखी गई हैं। कुछ मामलों में पैंक्रियाज और गॉल ब्लैडर से जुड़ी परेशानियां भी सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा एक जटिल बीमारी है और केवल इंजेक्शन से इसका स्थायी समाधान नहीं मिलता। सही डाइट, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव अब भी सबसे अहम उपाय माने जाते हैं।

यही कारण है कि डॉक्टर बार-बार यह सलाह दे रहे हैं कि फैटलॉस इंजेक्शन को स्लिमिंग शॉर्टकटसमझकर लेने की बजाय केवल मेडिकल जरूरत और डॉक्टर की निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए।

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