दवा व्यवसायी के बेटे की शादी का कार्ड हुआ चर्चित:निमंत्रण कार्ड पर दिया दहेज के खिलाफ संदेश, कहा-इससे रिश्तों में आती है खटास

दवा व्यवसायी के बेटे की शादी का कार्ड हुआ चर्चित:निमंत्रण कार्ड पर दिया दहेज के खिलाफ संदेश, कहा-इससे रिश्तों में आती है खटास

कोडरमा जिले में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक पहल सामने आई है। नवलशाही थाना क्षेत्र के ग्राम खरखार निवासी दवा व्यवसायी बृजकिशोर शर्मा उर्फ बिरजू शर्मा ने अपने बेटे राहुल की शादी दहेज मुक्त करने का संकल्प लिया है। इस शादी का निमंत्रण कार्ड भी दहेज मुक्त विवाह का संदेश दे रहा है, जो अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल का विवाह 20 अप्रैल को सपना के साथ तय हुआ है। बृजकिशोर शर्मा ने इस विवाह को न केवल दहेज मुक्त रखा है, बल्कि उन्होंने निमंत्रण कार्ड पर भी स्पष्ट रूप से दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश छपवाया है। यह पहल समाज को एक मजबूत संदेश दे रही है। बताते चलें कि बृजकिशोर शर्मा के पुत्र राहुल अपने पिता के साथ एक मेडिकल की दुकान चलाते हैं और साथ ही साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। वहीं, उनकी होने वाली पत्नी सपना भी फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं। सपना के पिता महेंद्र शर्मा दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं। वे दहेज देने में सक्षम भी थे। बावजूद इसके बृजकिशोर शर्मा ने इसका सख्त विरोध किया। दहेज को लेकर विवाद बने रहते हैं
बृजकिशोर शर्मा ने बताया कि उन्होंने समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते हुए कई बार देखा है कि दहेज की मांग के कारण तय रिश्ते भी टूट जाते हैं। लड़का-लड़की और दोनों परिवार एक-दूसरे को पसंद करने के बावजूद दहेज की वजह से रिश्तों में खटास आ जाती है। उन्होंने यह भी अनुभव किया है कि कुछ मामलों में शादी के बाद भी दहेज को लेकर विवाद बने रहते हैं, जिससे दोनों परिवारों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें अपने बेटे की शादी बिना किसी दहेज के करने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। बृजकिशोर शर्मा ने स्पष्ट किया कि लड़की पक्ष से किसी भी प्रकार के गहने, नगद राशि, वाहन या अन्य सामान की कोई मांग नहीं की गई है। उनका मानना है कि विवाह एक पवित्र बंधन है और इसे लेन-देन या बोझ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। पंचायत के दौरान लिया संकल्प
बृजकिशोर शर्मा ने बताया कि वे गांव में होने वाली पंचायत में कई बार पंच की भूमिका में जाते रहते हैं। इस दौरान उन्होंने जब शादी-विवाह से टूटे रिश्तों की पंचायत की तो पाया कि अधिकांश मामलों में रिश्ते टूटने की वजह दहेज रही है। इस दौरान उन्हें लगा कि समाज में दहेज मुक्त शादी होनी चाहिए ताकि रिश्तों के टूटने का दौर खत्म हो। इसी दौरान उन्होंने संकल्प लिया कि जब भी वे अपने पुत्र की शादी करेंगे वह दहेज का लेनदेन नहीं करेंगे। निमंत्रण पत्र के साथ लोगों के घर-घर तक पहुंच रहा है यह खास संदेश
उन्होंने बताया कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार शादी का आयोजन करेंगे। विवाह के बाद 22 अप्रैल को प्रतिभोज का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें समाज के लोग शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस अनोखी पहल का उद्देश्य सिर्फ अपने परिवार तक सीमित रखना नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने कहा कि कई लोग दहेज मुक्त विवाह करते तो हैं, लेकिन उसका संदेश ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंच पाता। इसलिए उन्होंने निमंत्रण पत्र में ही “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बिना दहेज बेटी अपने घर लाओ” का स्लोगन छपवाया है ताकि यह संदेश हर उस व्यक्ति तक पहुंचे जो इस शादी में आमंत्रित है। कोडरमा जिले में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक पहल सामने आई है। नवलशाही थाना क्षेत्र के ग्राम खरखार निवासी दवा व्यवसायी बृजकिशोर शर्मा उर्फ बिरजू शर्मा ने अपने बेटे राहुल की शादी दहेज मुक्त करने का संकल्प लिया है। इस शादी का निमंत्रण कार्ड भी दहेज मुक्त विवाह का संदेश दे रहा है, जो अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल का विवाह 20 अप्रैल को सपना के साथ तय हुआ है। बृजकिशोर शर्मा ने इस विवाह को न केवल दहेज मुक्त रखा है, बल्कि उन्होंने निमंत्रण कार्ड पर भी स्पष्ट रूप से दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश छपवाया है। यह पहल समाज को एक मजबूत संदेश दे रही है। बताते चलें कि बृजकिशोर शर्मा के पुत्र राहुल अपने पिता के साथ एक मेडिकल की दुकान चलाते हैं और साथ ही साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। वहीं, उनकी होने वाली पत्नी सपना भी फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं। सपना के पिता महेंद्र शर्मा दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं। वे दहेज देने में सक्षम भी थे। बावजूद इसके बृजकिशोर शर्मा ने इसका सख्त विरोध किया। दहेज को लेकर विवाद बने रहते हैं
बृजकिशोर शर्मा ने बताया कि उन्होंने समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते हुए कई बार देखा है कि दहेज की मांग के कारण तय रिश्ते भी टूट जाते हैं। लड़का-लड़की और दोनों परिवार एक-दूसरे को पसंद करने के बावजूद दहेज की वजह से रिश्तों में खटास आ जाती है। उन्होंने यह भी अनुभव किया है कि कुछ मामलों में शादी के बाद भी दहेज को लेकर विवाद बने रहते हैं, जिससे दोनों परिवारों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें अपने बेटे की शादी बिना किसी दहेज के करने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। बृजकिशोर शर्मा ने स्पष्ट किया कि लड़की पक्ष से किसी भी प्रकार के गहने, नगद राशि, वाहन या अन्य सामान की कोई मांग नहीं की गई है। उनका मानना है कि विवाह एक पवित्र बंधन है और इसे लेन-देन या बोझ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। पंचायत के दौरान लिया संकल्प
बृजकिशोर शर्मा ने बताया कि वे गांव में होने वाली पंचायत में कई बार पंच की भूमिका में जाते रहते हैं। इस दौरान उन्होंने जब शादी-विवाह से टूटे रिश्तों की पंचायत की तो पाया कि अधिकांश मामलों में रिश्ते टूटने की वजह दहेज रही है। इस दौरान उन्हें लगा कि समाज में दहेज मुक्त शादी होनी चाहिए ताकि रिश्तों के टूटने का दौर खत्म हो। इसी दौरान उन्होंने संकल्प लिया कि जब भी वे अपने पुत्र की शादी करेंगे वह दहेज का लेनदेन नहीं करेंगे। निमंत्रण पत्र के साथ लोगों के घर-घर तक पहुंच रहा है यह खास संदेश
उन्होंने बताया कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार शादी का आयोजन करेंगे। विवाह के बाद 22 अप्रैल को प्रतिभोज का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें समाज के लोग शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस अनोखी पहल का उद्देश्य सिर्फ अपने परिवार तक सीमित रखना नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने कहा कि कई लोग दहेज मुक्त विवाह करते तो हैं, लेकिन उसका संदेश ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंच पाता। इसलिए उन्होंने निमंत्रण पत्र में ही “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बिना दहेज बेटी अपने घर लाओ” का स्लोगन छपवाया है ताकि यह संदेश हर उस व्यक्ति तक पहुंचे जो इस शादी में आमंत्रित है।  

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