IMD Weather Update: इस बार मार्च माह में एक के बाद एक लगातार पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता से गर्मी के मौसम में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग (आइएमडी) के अनुसार अप्रैल में औसत से ज्यादा बारिश होगी और अगले तीन माह में गर्मी की तपिश थोड़ी कम रहेगी। आइएमडी ने मंगलवार को अप्रैल से जून तक गर्मी ऋतु का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार अगले तीन माह देश के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य व सामान्य से नीचे रहेगा। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य व सामान्य से थोड़ा अधिक रहेगा।
इस बार मार्च माह में मौसम का अंदाज बदला हुआ नजर आया। तापमान के रफ्तार पकड़ने के दिनों में आंधी-बारिश का मौसम बन गया। उत्तर-पश्चिम भारत में एक के बाद एक अलग-अलग पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने एवं चक्रवाती तंत्रों के बदलने से हिमालयी रेंज के राज्यों में व्यापक बर्फबारी और मैदानी भागों के राज्यों में बारिश का मौसम रहा। इससे कई राज्यों के अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई।
मार्च में औसत से ज्यादा बारिश
मार्च में औसत से 13 प्रतिशत ज्यादा यानी 33.7 एमएम बारिश दर्ज की गई। अब अप्रैल माह में भी एक के बाद एक संभावित पश्चिमी विक्षोभों के कारण आंधी-बारिश के मौसम की संभावना जताई गई है। आइएमडी के अनुसार अप्रैल माह में कई हिस्सों में दीर्घकालिन औसत (एलपीए) से अधिक बारिश होने की संभावना है। अप्रेल के एलपीए 39.2 एमएम की तुलना में 112 प्रतिशत बारिश होगी। यह बारिश पूर्वी व पूर्वाेत्तर भागाें को छोड़कर शेष हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
लू के दिन ज्यादा रहेंगे
आइएमडी के अनुसार अप्रैल-जून तक अधिकतम तापमान भले ही सामान्य से कम रहेगा। लेकिन इन दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत, प्रायद्वीपीय भारत और दक्षिणी क्षेत्रों में हीट वेव की स्थिति अधिक बार रहने की संभावना है। अप्रैल में विशेष रूप से ओडिशा के तटीय क्षेत्र, तमिलनाडु, पुदुचेरी, आंध्र प्रदेश और गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक के कुछ इलाकों में हीटवेव की संख्या बढ़ सकती हैं।

कश्मीर की 5 झीलें ला सकती हैं तबाही
वहीं, वैज्ञानिकों ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर की पांच झीलों को लेकर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी की पांच झीलें ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर का पानी इकट्ठा होने से आने वाले बाढ़ के लिए बेहद संवेदनशील हैं। अगर इनमें अचानक पानी का दबाव बढ़ता है और झील फटती है तो निचले इलाकों में भारी तबाही हो सकती है। इस खतरे से करीब 2,704 इमारतें, 15 बड़े पुल, सड़कें और एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकता है।
इस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि इन झीलों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। इसके लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि ये झीलें तुरंत टूटने वाली हैं। कुलगाम जिले की ब्रमसर और चिरसर, गांदरबल जिले की नुंदकोल और गंगाबल, शोपियां जिले की भागसर झील को सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।


