भाषा विवाद को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) के बीच 8 महीने पहले चली तीखी बयानबाजी अब अदालत की दहलीज पर पहुंच चुकी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक नेता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए नासिक जिला न्यायालय ने निशिकांत दुबे को 7 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
पिछले साल जुलाई महीने में ‘मराठी बनाम हिंदी’ विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राज ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर वे बिहार-यूपी में आएंगे तो उन्हें पटक-पटक कर पीटेंगे। निशिकांत दुबे के इस बयान पर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। साथ ही मनसे की ओर से इस मामले को न्यायालय तक ले जाया गया था।
‘पटक-पटक कर मारेंगे’ वाले बयान पर बवाल
मनसे के नासिक शहर प्रमुख सुदाम कोंबडे ने निशिकांत दुबे के खिलाफ नासिक जिला न्यायालय में याचिका दायर की है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि 7 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में भाजपा नेता निशिकांत दुबे को खुद उपस्थित रहना होगा। इस याचिका पर अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी। अब इस सुनवाई पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि निशिकांत दुबे नासिक अदालत में पेश होते हैं या नहीं।
भाजपा सांसद के बयान पर तब राज ठाकरे ने कहा था, “मैं निशिकांत दुबे को बोलता हूं, तुम मुंबई में आ जाओ, मुंबई के समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे। अगर किसी ने मराठी का अपमान किया तो उसके गाल को लाल कर दिया जाएगा।“
मनसे ने दी है चेतावनी
याचिका दाखिल करते समय मनसे नेता सुदाम कोंबडे ने निशिकांत दुबे को कड़ी चेतावनी भी दी थी। उनका आरोप है कि दुबे लगातार राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपमानजनक बयान दे रहे हैं। कोंबडे ने यह भी कहा था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उन्हें ऐसे बयान देने से बचने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद वह नहीं रुके।
मनसे नेता ने कहा था कि अब उन्हें सबक सिखाना जरूरी हो गया है। उन्होंने दुबे को नासिक आने की खुली चुनौती देते हुए कहा था कि वह यहां आये बस, हम उन्हें बताएंगे कि कैसे पटक-पटक के मारते हैं।
सीएम फडणवीस ने किया था बचाव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निशिकांत दुबे के बयान पर कहा था, “उन्होंने जो बयान दिया है वह आम मराठी लोगों के लिए नहीं, बल्कि भाषा विवाद को हवा देने वाले दलों के है। लेकिन मैं मानता हूं कि उनका बयान पूरी तरह से सही नहीं है। महाराष्ट्र और मराठी लोगों का देश की प्रगति में जो योगदान है, उसे कोई नकार नहीं सकता। ऐसा कोई करता है तो वह गलत है।”


