भगवान महावीरजी के अभिषेक के लिए पांचना बांध से गंभीर नदी में छोड़ा पानी

भगवान महावीरजी के अभिषेक के लिए पांचना बांध से गंभीर नदी में छोड़ा पानी

करौली. अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में आगामी 27 मार्च से शुरू हो रहे भगवान महावीरजी के वार्षिक मेले के मद्देनजर शनिवार को करौली के पांचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ा गया। शाम करीब 5 बजे जल संसाधन विभाग ने बांध के दो गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की। दो गेटों से पानी निकासी होने के बाद गंभीर नदी के पेटे में पानी कलकल करते हुए आगे बढ़ गया। अगले 6-7 दिन में पानी श्रीमहावीरजी कस्बे की गंभीर नदी तक पहुंच जाएगा। इस दौरान बांध से कुल 300 एमसीएफटी पानी नदी में छोड़ा जाएगा। श्रीमहावीरजी मेले के मद्देनजर पांचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोडऩे की राज्य सरकार से अनुमति मिली है। इसके बाद जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता वीरङ्क्षसह जाटव, कनिष्ठ अभियंता भवानी ङ्क्षसह मीना सहित अन्य कार्मिक बांध पर पहुंचे। जहां पूजा-अर्चना के बाद कंट्रोल बोर्ड का बटन दबा कर बांध से पानी की निकासी शुरू की। इस दौरान गेट नम्बर 3 और 4 से 250 क्यूसेक पानी की निकासी शुरू की गई। सहायक अभियंता वीरङ्क्षसह जाटव ने बताया कि बांध के दो गेट खोल कर पानी की निकासी शुरू की है। बांध के दो गेटों को खोलकर 250 क्यूसेक पानी की निकासी गंभीर नदी में की जा रही है। उन्होंने बताया कि आगामी 3 अप्रेल तक पानी की निकासी जारी रहेगी। इस अवधि में कुल करीब 300 एमसीएफटी पानी नदी में छोड़ा जाएगा। गौरतलब है कि परम्परा के अनुसार भगवान महावीरजी के वार्षिक मेले के दौरान भगवान जिनेन्द्र की रथयात्रा निकलती है।
रथयात्रा गंभीर नदी के तट पर पहुंचती हैं, जहां परम्परा के अनुसार गंभीर नदी के पानी से भगवान का अभिषेक किया जाता है। इसी के मद्देनजर पांचना बांध से गंभीर नदी के लिए पानी छोड़ा जाता है। सहायक अभियंता ने बताया कि पांचना बांध की कुल भराव क्षमता 258.62 मीटर है और गंभीर नदी में पानी छोडऩे से पहले बांध में 257.30 मीटर पर गेज था।
पांचना बांध जिले का सबसे बड़ा बांध है, जिसमें कुल 7 गेट हैं। पानी छोडऩे के अवसर पर अभियंताओं के अलावा महेन्द्र गुर्जर, राधे गुर्जर आदि कर्मचारी भी
मौजूद रहे।

जलस्रोत होंगे रिचार्ज, पशु-पक्षियों की भी बुझेगी प्यास
गंभीर नदी में पानी पहुंचने से नदी तट के आसपास के गांवों के जलस्रोत भी रिचार्ज हो सकेंगे। जिससे गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। इसके अलावा गर्मियों में पशु-पक्षियों को भी पानी मिल सकेगा।

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