भोजपुरी सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह, जिन्होंने लाखों-करोड़ों दिलों पर राज किया। विधानसभा चुनाव में NDA के लिए जी-जान से जुटे। कार्यकर्ताओं में जोश भरा… मगर जब राज्यसभा की बारी आई, तो भाजपा ने टिकट नहीं दिया। दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात। गुंजन सिंह का ‘लगभग तय’ वाला दावा। सोशल मीडिया पर ‘पक्का हो गया’ की अफवाहें सब कुछ था, लेकिन अंत में नाम नहीं आया। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…पवन सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी क्यों नहीं बनाया। पवन सिंह को कैंडिडेट नहीं बनाने की 3 बड़ी वजहें 1. पवन सिंह की विवादित छवि भोजपुरी स्टार पवन सिंह महिला कलाकारों और अपने रवैये को लेकर लगातार सुर्खियों में रहते हैं। कभी साथी कलाकार के बॉडी टच करने का मामला सामने आता है तो कभी पत्नी का विवाद। ऐसे में भाजपा निगेटिव इमेज से बचना चाहती है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘पवन सिंह विवादों में रहते हैं। ऐसे में उनको राज्यसभा भेजने से पार्टी का समीकरण बिगड़ता। आगे हो सकता है कि पार्टी उनको MLC बना दें या लोकसभा का चुनाव लड़वाए।’ अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘भाजपा राज्यसभा में अपने वैसे नेताओं को भेजती है, जिनका बैकग्राउंड पार्टी आधारित हो। पार्टी के प्रति समर्पित हो। पवन सिंह के साथ ऐसा नहीं है। वह पहले भी पार्टी का अनुशासन तोड़ चुके हैं।’ पवन सिंह पर पार्टी का अनुशासन तोड़ने का आरोप 2. फॉरवर्ड कोटे से नितिन नवीन गए, पवन के लिए जगह नहीं बची बिहार की 5 राज्यसभा सीटों में से भाजपा के कोटे में 2 सीटें आई है। इस पर पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम को कैंडिडेट बनाया है। एक फॉरवर्ड और एक दलित। 3. कुशवाहा का प्रेशर काम आया 5वीं सीट को लेकर NDA में छोटी पार्टियां उपेंद्र कुशवाहा की RLM, जीतनराम मांझी की HAM और चिराग पासवान की LJP(R) का दबाव था। कुशवाहा की सीट खाली हो रही थी, इसलिए उनकी दावेदारी मजबूत थी। कुशवाहा ने इसके लिए 2024 लोकसभा चुनाव में किए गए वादों की याद दिलाई। जिसके कारण भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ा और कुशवाहा के लिए 5वीं सीट छोड़नी पड़ी। हालांकि, कुशवाहा को राज्यसभा भेजने के पीछे उनका वोट बैंक बड़ा कारण है। इसे ऐसे समझिए… भोजपुरी सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह, जिन्होंने लाखों-करोड़ों दिलों पर राज किया। विधानसभा चुनाव में NDA के लिए जी-जान से जुटे। कार्यकर्ताओं में जोश भरा… मगर जब राज्यसभा की बारी आई, तो भाजपा ने टिकट नहीं दिया। दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात। गुंजन सिंह का ‘लगभग तय’ वाला दावा। सोशल मीडिया पर ‘पक्का हो गया’ की अफवाहें सब कुछ था, लेकिन अंत में नाम नहीं आया। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…पवन सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी क्यों नहीं बनाया। पवन सिंह को कैंडिडेट नहीं बनाने की 3 बड़ी वजहें 1. पवन सिंह की विवादित छवि भोजपुरी स्टार पवन सिंह महिला कलाकारों और अपने रवैये को लेकर लगातार सुर्खियों में रहते हैं। कभी साथी कलाकार के बॉडी टच करने का मामला सामने आता है तो कभी पत्नी का विवाद। ऐसे में भाजपा निगेटिव इमेज से बचना चाहती है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘पवन सिंह विवादों में रहते हैं। ऐसे में उनको राज्यसभा भेजने से पार्टी का समीकरण बिगड़ता। आगे हो सकता है कि पार्टी उनको MLC बना दें या लोकसभा का चुनाव लड़वाए।’ अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘भाजपा राज्यसभा में अपने वैसे नेताओं को भेजती है, जिनका बैकग्राउंड पार्टी आधारित हो। पार्टी के प्रति समर्पित हो। पवन सिंह के साथ ऐसा नहीं है। वह पहले भी पार्टी का अनुशासन तोड़ चुके हैं।’ पवन सिंह पर पार्टी का अनुशासन तोड़ने का आरोप 2. फॉरवर्ड कोटे से नितिन नवीन गए, पवन के लिए जगह नहीं बची बिहार की 5 राज्यसभा सीटों में से भाजपा के कोटे में 2 सीटें आई है। इस पर पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम को कैंडिडेट बनाया है। एक फॉरवर्ड और एक दलित। 3. कुशवाहा का प्रेशर काम आया 5वीं सीट को लेकर NDA में छोटी पार्टियां उपेंद्र कुशवाहा की RLM, जीतनराम मांझी की HAM और चिराग पासवान की LJP(R) का दबाव था। कुशवाहा की सीट खाली हो रही थी, इसलिए उनकी दावेदारी मजबूत थी। कुशवाहा ने इसके लिए 2024 लोकसभा चुनाव में किए गए वादों की याद दिलाई। जिसके कारण भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ा और कुशवाहा के लिए 5वीं सीट छोड़नी पड़ी। हालांकि, कुशवाहा को राज्यसभा भेजने के पीछे उनका वोट बैंक बड़ा कारण है। इसे ऐसे समझिए…


