निजी स्कूलों पर एक लाख जुर्माने की चेतावनी:मनमानी फीस वसूली पर डीएम सख्त, आशुतोष द्विवेदी बोले- नियमों का पालन करना जरूरी

निजी स्कूलों पर एक लाख जुर्माने की चेतावनी:मनमानी फीस वसूली पर डीएम सख्त, आशुतोष द्विवेदी बोले- नियमों का पालन करना जरूरी

कटिहार में निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूली पर जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यह कार्रवाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन शुरू होने के बाद मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। जिलाधिकारी के आदेश में बताया गया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। इस दौरान अभिभावकों से शिकायतें मिली हैं कि कुछ विद्यालय नियमों के विरुद्ध पुनः नामांकन शुल्क, वार्षिक शुल्क और अन्य अनुचित शुल्क वसूल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अभिभावकों को अनुचित आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से निर्धारित दुकानों से ही ऊंचे दामों पर पाठ्य पुस्तकें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसे अभिभावकों का आर्थिक शोषण माना गया है। जिलाधिकारी ने बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 और शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के नियम 11 (2) (ख) का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों का संचालन किसी व्यक्ति या समूह द्वारा लाभ के लिए नहीं किया जाएगा। निजी विद्यालयों द्वारा अनुचित आर्थिक लाभ के लिए किए गए कार्य प्रस्वीकृति की शर्तों का उल्लंघन माने जाएंगे। जिलाधिकारी ने यह भी आदेश दिया है कि यूनिफॉर्म के संबंध में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) (सी) के तहत कमजोर वर्ग और अलाभकारी समूह के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विद्यालयों को अपनी कुल क्षमता और आरक्षित सीटों का विवरण ऑनलाइन विभागीय पोर्टल पर अपडेट करना होगा। कैपिटेशन फीस और डोनेशन शुल्क पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कटिहार में निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूली पर जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अब निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यह कार्रवाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन शुरू होने के बाद मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। जिलाधिकारी के आदेश में बताया गया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। इस दौरान अभिभावकों से शिकायतें मिली हैं कि कुछ विद्यालय नियमों के विरुद्ध पुनः नामांकन शुल्क, वार्षिक शुल्क और अन्य अनुचित शुल्क वसूल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अभिभावकों को अनुचित आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से निर्धारित दुकानों से ही ऊंचे दामों पर पाठ्य पुस्तकें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसे अभिभावकों का आर्थिक शोषण माना गया है। जिलाधिकारी ने बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 और शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के नियम 11 (2) (ख) का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों का संचालन किसी व्यक्ति या समूह द्वारा लाभ के लिए नहीं किया जाएगा। निजी विद्यालयों द्वारा अनुचित आर्थिक लाभ के लिए किए गए कार्य प्रस्वीकृति की शर्तों का उल्लंघन माने जाएंगे। जिलाधिकारी ने यह भी आदेश दिया है कि यूनिफॉर्म के संबंध में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) (सी) के तहत कमजोर वर्ग और अलाभकारी समूह के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विद्यालयों को अपनी कुल क्षमता और आरक्षित सीटों का विवरण ऑनलाइन विभागीय पोर्टल पर अपडेट करना होगा। कैपिटेशन फीस और डोनेशन शुल्क पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

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