दरभंगा में सिंहवाड़ा प्रखंड विकास पदाधिकारी विक्रम भास्कर ने हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 के वार्ड सदस्य पति अजय मंडल से स्पष्टीकरण तलब किया है। उन पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों से अवैध वसूली का आरोप है। बीडीओ ने उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामला 9 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है। वायरल वीडियो में हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास प्लस सर्वे 2.0 में जोड़े गए लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर अवैध राशि लेने का आरोप लगाया गया था। वीडियो में आवास सहायक के साथ वार्ड सदस्य पति की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है।शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच और जियो-टैगिंग के दौरान हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 में विवाद खड़ा हो गया। योजना में नाम जोड़ने के लिए वसूली का आरोप ग्रामीणों ने प्रखंड से आए जांचकर्ता, ग्रामीण आवास सहायक और वार्ड सदस्य पति पर लाभार्थियों से अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि योजना में नाम जोड़ने के लिए ₹1000 और जियो-टैगिंग के नाम पर ₹500 प्रति लाभार्थी की मांग की जा रही थी। ग्रामीण सकलदेव राम ने आरोप लगाया कि जो लाभार्थी पैसे देने से इनकार कर रहे थे, उन्हें नाम काटने की धमकी दी जा रही थी। विरोध के दौरान पत्रकारों की मौजूदगी में वार्ड सदस्य पति की तलाशी ली गई, जिसमें उनकी जेब से ₹500 का नोट मिलने का दावा किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, नोट का क्रमांक मिलान करने पर यह एक लाभार्थी की ओर से दिए गए नोट से मेल खाता पाया गया। वार्ड संख्या-1 निवासी बिंदे कुमार ने बताया कि आवास योजना की सूची के अनुसार जियो-टैगिंग की जा रही थी और वार्ड सदस्य के सहयोग से कथित तौर पर सभी की मिलीभगत से लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे थे। स्थानीय निवासी राजन कुमार ने आरोप लगाया कि उनकी माता रीता देवी के नाम आवास योजना स्वीकृत है और जियो-टैगिंग के दौरान वार्ड सदस्य पति ने उनसे ₹500 लिए, जबकि मौके पर प्रखंड से आए कर्मी भी मौजूद थे। संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से जारी स्पष्टीकरण लेटर में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया से ये प्रतीत होता है कि वार्ड सदस्य पति अजय मंडल की ओर से लाभार्थियों से अवैध राशि का लेनदेन किया गया है और उनकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर राशि वसूलना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है। निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण नहीं देने की स्थिति में बिहार पंचायती राज अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा जाएगा। हालांकि, ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के निर्धारित मापदंडों के अनुसार जांच कर रहे थे और अब तक करीब 40 घरों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, धमकी दी गई और जबरन तलाशी ली गई। इसे उन्होंने साजिश कर फंसाने का प्रयास बताते हुए बीडीओ को लिखित शिकायत दी है। वार्ड सदस्य पति अजय मंडल ने भी सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना के बाद पंचायत में देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरभंगा में सिंहवाड़ा प्रखंड विकास पदाधिकारी विक्रम भास्कर ने हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 के वार्ड सदस्य पति अजय मंडल से स्पष्टीकरण तलब किया है। उन पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों से अवैध वसूली का आरोप है। बीडीओ ने उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामला 9 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है। वायरल वीडियो में हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास प्लस सर्वे 2.0 में जोड़े गए लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर अवैध राशि लेने का आरोप लगाया गया था। वीडियो में आवास सहायक के साथ वार्ड सदस्य पति की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है।शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच और जियो-टैगिंग के दौरान हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या-1 में विवाद खड़ा हो गया। योजना में नाम जोड़ने के लिए वसूली का आरोप ग्रामीणों ने प्रखंड से आए जांचकर्ता, ग्रामीण आवास सहायक और वार्ड सदस्य पति पर लाभार्थियों से अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि योजना में नाम जोड़ने के लिए ₹1000 और जियो-टैगिंग के नाम पर ₹500 प्रति लाभार्थी की मांग की जा रही थी। ग्रामीण सकलदेव राम ने आरोप लगाया कि जो लाभार्थी पैसे देने से इनकार कर रहे थे, उन्हें नाम काटने की धमकी दी जा रही थी। विरोध के दौरान पत्रकारों की मौजूदगी में वार्ड सदस्य पति की तलाशी ली गई, जिसमें उनकी जेब से ₹500 का नोट मिलने का दावा किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, नोट का क्रमांक मिलान करने पर यह एक लाभार्थी की ओर से दिए गए नोट से मेल खाता पाया गया। वार्ड संख्या-1 निवासी बिंदे कुमार ने बताया कि आवास योजना की सूची के अनुसार जियो-टैगिंग की जा रही थी और वार्ड सदस्य के सहयोग से कथित तौर पर सभी की मिलीभगत से लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे थे। स्थानीय निवासी राजन कुमार ने आरोप लगाया कि उनकी माता रीता देवी के नाम आवास योजना स्वीकृत है और जियो-टैगिंग के दौरान वार्ड सदस्य पति ने उनसे ₹500 लिए, जबकि मौके पर प्रखंड से आए कर्मी भी मौजूद थे। संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से जारी स्पष्टीकरण लेटर में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया से ये प्रतीत होता है कि वार्ड सदस्य पति अजय मंडल की ओर से लाभार्थियों से अवैध राशि का लेनदेन किया गया है और उनकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर राशि वसूलना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है। निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण नहीं देने की स्थिति में बिहार पंचायती राज अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा जाएगा। हालांकि, ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के निर्धारित मापदंडों के अनुसार जांच कर रहे थे और अब तक करीब 40 घरों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, धमकी दी गई और जबरन तलाशी ली गई। इसे उन्होंने साजिश कर फंसाने का प्रयास बताते हुए बीडीओ को लिखित शिकायत दी है। वार्ड सदस्य पति अजय मंडल ने भी सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना के बाद पंचायत में देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


