वार्ड सदस्य पर ग्रामीणों से पैसे लेने का आरोप:प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच के दौरान हंगामा; कर्मी ने आरोप से किया इनकार

वार्ड सदस्य पर ग्रामीणों से पैसे लेने का आरोप:प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच के दौरान हंगामा; कर्मी ने आरोप से किया इनकार

दरभंगा के सिंहवाड़ा प्रखंड अंतर्गत हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या एक में प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच और जियो टैगिंग के दौरान विवाद हो गया। ग्रामीणों ने प्रखंड से आए जांचकर्ता, ग्रामीण आवास सहायक व वार्ड सदस्य पर लाभार्थियों से अवैध वसूली का आरोप लगाया है। संबंधित कर्मियों और वार्ड सदस्य ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए साजिश कर फंसाने की बात कही है। प्रखंड कार्यालय से हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत में आवास योजना की जांच के लिए ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह पहुंचे थे। उनके साथ वार्ड संख्या एक के वार्ड सदस्य अजय मंडल भी लाभार्थियों के घर-घर जाकर जियो टैगिंग और भौतिक सत्यापन में शामिल थे। इसी दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि योजना में पहले नाम जोड़ने के लिए ₹1000 और अब जियो टैगिंग के नाम पर ₹500 प्रति लाभार्थी की मांग की जा रही है। नाम काटने की धमकी दी जा रही वार्ड सदस्य सकलदेव राम ने आरोप लगाया कि जो लाभार्थी पैसे देने से इनकार कर रहे हैं, उन्हें नाम काटने की धमकी दी जा रही है। विरोध के दौरान वार्ड सदस्य की तलाशी ली गई, जिसमें उनकी जेब से ₹500 का नोट मिलने का दावा किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह नोट लाभार्थी की ओर से दिया गया था और नोट का क्रमांक मिलान करने पर वह मेल खाता पाया गया। हरिहरपुर पश्चिमी वार्ड संख्या एक निवासी बिंदे कुमार ने बताया कि आवास योजना की सूची के अनुसार जियो टैगिंग की जा रही थी और वार्ड सदस्य के सहयोग से कथित तौर पर सभी की मिलीभगत से लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे थे। स्थानीय निवासी राजन कुमार ने बताया कि उनकी माता रीता देवी के नाम आवास योजना स्वीकृत है। जियो टैगिंग के दौरान वार्ड सदस्य ने उनकी मां से ₹500 लिए, जबकि मौके पर प्रखंड से आए एक कर्मी भी मौजूद थे। चमनपुर निवासी यूटूबर अजहर ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी, जिसके सत्यापन के लिए वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और दर्जनों लाभार्थियों से अवैध वसूली की जा चुकी थी। शिकायत की बात सामने आने के बाद कथित रूप से पैसा लौटाया गया। हालांकि इस पूरे मामले में ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, धमकाया गया और जबरन तलाशी ली गई। उन्होंने इसे जानबूझकर फंसाने की साजिश बताया है और कहा कि इस संबंध में उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। वहीं वार्ड संख्या एक के वार्ड सदस्य अजय मंडल ने भी सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से यह आरोप लगाए जा रहे हैं। दरभंगा के सिंहवाड़ा प्रखंड अंतर्गत हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या एक में प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच और जियो टैगिंग के दौरान विवाद हो गया। ग्रामीणों ने प्रखंड से आए जांचकर्ता, ग्रामीण आवास सहायक व वार्ड सदस्य पर लाभार्थियों से अवैध वसूली का आरोप लगाया है। संबंधित कर्मियों और वार्ड सदस्य ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए साजिश कर फंसाने की बात कही है। प्रखंड कार्यालय से हरिहरपुर पश्चिमी पंचायत में आवास योजना की जांच के लिए ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह पहुंचे थे। उनके साथ वार्ड संख्या एक के वार्ड सदस्य अजय मंडल भी लाभार्थियों के घर-घर जाकर जियो टैगिंग और भौतिक सत्यापन में शामिल थे। इसी दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि योजना में पहले नाम जोड़ने के लिए ₹1000 और अब जियो टैगिंग के नाम पर ₹500 प्रति लाभार्थी की मांग की जा रही है। नाम काटने की धमकी दी जा रही वार्ड सदस्य सकलदेव राम ने आरोप लगाया कि जो लाभार्थी पैसे देने से इनकार कर रहे हैं, उन्हें नाम काटने की धमकी दी जा रही है। विरोध के दौरान वार्ड सदस्य की तलाशी ली गई, जिसमें उनकी जेब से ₹500 का नोट मिलने का दावा किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह नोट लाभार्थी की ओर से दिया गया था और नोट का क्रमांक मिलान करने पर वह मेल खाता पाया गया। हरिहरपुर पश्चिमी वार्ड संख्या एक निवासी बिंदे कुमार ने बताया कि आवास योजना की सूची के अनुसार जियो टैगिंग की जा रही थी और वार्ड सदस्य के सहयोग से कथित तौर पर सभी की मिलीभगत से लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे थे। स्थानीय निवासी राजन कुमार ने बताया कि उनकी माता रीता देवी के नाम आवास योजना स्वीकृत है। जियो टैगिंग के दौरान वार्ड सदस्य ने उनकी मां से ₹500 लिए, जबकि मौके पर प्रखंड से आए एक कर्मी भी मौजूद थे। चमनपुर निवासी यूटूबर अजहर ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी, जिसके सत्यापन के लिए वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और दर्जनों लाभार्थियों से अवैध वसूली की जा चुकी थी। शिकायत की बात सामने आने के बाद कथित रूप से पैसा लौटाया गया। हालांकि इस पूरे मामले में ग्रामीण आवास सहायक सह चेकर रामकृत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, धमकाया गया और जबरन तलाशी ली गई। उन्होंने इसे जानबूझकर फंसाने की साजिश बताया है और कहा कि इस संबंध में उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। वहीं वार्ड संख्या एक के वार्ड सदस्य अजय मंडल ने भी सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने की नीयत से यह आरोप लगाए जा रहे हैं।  

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