पश्चिम एशिया में युद्ध की ज्वाला भड़क उठी है। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) पर होने वाले हमलों को फिलहाल 10 दिनों के लिए टालने का आदेश दिया है। अब यह संभावित सैन्य कार्रवाई (Military Action) 6 अप्रेल तक स्थगित रहेगी। ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ शांति समझौते (Peace Deal) को लेकर बातचीत “बहुत अच्छी” चल रही है, जिसके कारण उन्होंने यह मोहलत (Deadline Extension) दी है। युद्ध के इस कठिन समय में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र शांति दूत की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इस्हाक डार ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद, अमेरिका और ईरानी अधिकारियों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है। इन मध्यस्थता प्रयासों का मुख्य उद्देश्य युद्ध को पूर्ण पैमाने पर फैलने से रोकना है।
हताहतों का बढ़ता आंकड़ा (Rising Casualty Toll)
ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अली जाफ़रियन के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के हमलों में अब तक कम से कम 1,937 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे ईरान के भीतर मानवीय संकट गहरा गया है। अस्पतालों में घायलों की भीड़ है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव दिख रहा है।
लेबनान में इजराइली कार्रवाई (Lebanon Border Conflict)
इजराइल ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। लेबनान के ज़हरानी नदी के दक्षिणी क्षेत्रों में रहने वाले सभी निवासियों को तुरंत इलाका खाली करने का आदेश दिया गया है। यह स्थान इजराइल सीमा से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से जारी इजराइली हमलों में अब तक 1,100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। वैश्विक नेताओं ने इस देरी का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि 10 दिन का समय बहुत कम है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “अस्थायी राहत” करार देते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं ईरान के भीतर ट्रंप के इस बयान को “मनोवैज्ञानिक युद्ध” का हिस्सा माना जा रहा है।
वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका
अगले 10 दिनों में तुर्की और मिस्र के राजनयिक तेहरान और वाशिंगटन के बीच सक्रिय रहेंगे। यदि 6 अप्रैल तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो वैश्विक तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में भारी उछाल आने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका का मुख्य निशाना ईरान का ऊर्जा क्षेत्र ही है। इस युद्ध का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं है। खाड़ी के देशों में स्थित होटलों और पर्यटन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ईरानी सेना की सक्रियता को देखते हुए समुद्री व्यापार मार्गों (Shipping Routes) पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।


