बेगूसराय में मातृ मृत्यु दर पर लगाम लगाने और गर्भवती महिलाओं को एनीमिया (खून की कमी) के गंभीर खतरे से बाहर निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक क्रांतिकारी शुरुआत की है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की ओर से पटना से फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) दवा के राज्यव्यापी ऑनलाइन उद्घाटन के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल में भी इस विशेष सेवा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके तहत आज पहले दिन डाक्टरों की देख-रेख में 20 एनीमिक महिलाओं को यह दवा दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार एफएमसी (FCM) एक आधुनिक तकनीक है, जो सीधे रक्तप्रवाह में आयरन पहुंचाती है। अब गर्भवती महिलाओं को महीनों तक आयरन की गोलियां खाने और उनके धीमे असर से राहत मिलेगी। गोलियां असर दिखाने में लंबा समय लेती है। यह इंजेक्शन मात्र 15 से 20 मिनट की ड्रिप के माध्यम से हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से सुधार देता है। सदर अस्पताल के डॉ. प्राची ने बताया कि यह उन महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच है, जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 से 9.9 के बीच है। इंजेक्शन लगने के बाद अगले 3 महीने तक आयरन की गोलियां खाने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। हीमोग्लोबिन में तेजी से वृद्धि होने से प्रसव के समय जटिलता का खतरा कम होगा। इमरजेंसी किट के साथ प्रशिक्षित स्टाफ तैनात अस्पताल अधीक्षक डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि गंभीर एनीमिया प्रसव के दौरान जानलेवा हो सकता है। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सदर अस्पताल में 20 बेड का एक समर्पित वार्ड तैयार किया गया है। दवा चढ़ाने के बाद मरीजों को 30 मिनट तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाता है। दवा की पर्याप्त उपलब्धता है और इमरजेंसी किट के साथ प्रशिक्षित स्टाफ तैनात हैं। सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दूसरी और तीसरी तिमाही की उन महिलाओं को चिह्नित करें, जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है। इस मिशन में पिरामल फाउंडेशन सामुदायिक स्तर पर जागरूकता फैला रहा है। फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक मिश्रा और जयंत चौधरी ने बताया कि वे परिवारों को जागरूक किया जा रहा हैं। जिससे महिलाएं उपचार से डरें नहीं और समय पर जांच कराएं। इसके लिए मीडिया का भी बहुत सहयोग मिल रहा है। इसके अलावा धर्मगुरु, स्थानीय जन प्रतिनिधि ,पंचायत प्रतिनिधि, जीविका दीदी और स्थानीय एनजीओ से सहयोग लेकर इसे जन आंदोलन बनाया जाएगा।सबके सहयोग से ही एनीमिया मुक्त बेगूसराय का सपना सच होगा। सदर अस्पताल के साथ-साथ यह सेवा अनुमंडल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध होगी। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर चुनौती जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा (DIO) ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर चुनौती है। कई बार आयरन की गोलियां (IFA) लेने के बावजूद महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर नहीं सुधरता। FCM तकनीक एक गेम-चेंजर साबित होगी, क्योंकि यह सीधे रक्तप्रवाह में आयरन पहुंचाती है। गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि FCM इंजेक्शन की उपलब्धता ग्राउंड लेवल पर हो। टीकाकरण और नियमित प्रसव पूर्व जांच के दौरान ऐसी महिलाओं की स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। उच्च जोखिम वाली गर्भधारण के मामलों को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इस पहल से न केवल प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आएगी, बल्कि जन्म लेने वाले शिशुओं के स्वास्थ्य में भी व्यापक सुधार होने की उम्मीद है। जिला स्वास्थ्य प्रबंधक (DHM) पंकज कुमार ने बताया कि जिले के स्टॉक में दवा की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ किया गया है। सदर अस्पताल और अनुमंडल अस्पतालों में इसके लिए विशेष बेड और इमरजेंसी किट की व्यवस्था की गई है। जिससे किसी भी प्रतिकूल स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। हमारा लक्ष्य हर उस गर्भवती महिला तक पहुंचना है जो एनीमिया के कारण जोखिम में है। बेगूसराय में मातृ मृत्यु दर पर लगाम लगाने और गर्भवती महिलाओं को एनीमिया (खून की कमी) के गंभीर खतरे से बाहर निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक क्रांतिकारी शुरुआत की है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की ओर से पटना से फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) दवा के राज्यव्यापी ऑनलाइन उद्घाटन के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल में भी इस विशेष सेवा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके तहत आज पहले दिन डाक्टरों की देख-रेख में 20 एनीमिक महिलाओं को यह दवा दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार एफएमसी (FCM) एक आधुनिक तकनीक है, जो सीधे रक्तप्रवाह में आयरन पहुंचाती है। अब गर्भवती महिलाओं को महीनों तक आयरन की गोलियां खाने और उनके धीमे असर से राहत मिलेगी। गोलियां असर दिखाने में लंबा समय लेती है। यह इंजेक्शन मात्र 15 से 20 मिनट की ड्रिप के माध्यम से हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से सुधार देता है। सदर अस्पताल के डॉ. प्राची ने बताया कि यह उन महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच है, जिनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 से 9.9 के बीच है। इंजेक्शन लगने के बाद अगले 3 महीने तक आयरन की गोलियां खाने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। हीमोग्लोबिन में तेजी से वृद्धि होने से प्रसव के समय जटिलता का खतरा कम होगा। इमरजेंसी किट के साथ प्रशिक्षित स्टाफ तैनात अस्पताल अधीक्षक डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि गंभीर एनीमिया प्रसव के दौरान जानलेवा हो सकता है। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सदर अस्पताल में 20 बेड का एक समर्पित वार्ड तैयार किया गया है। दवा चढ़ाने के बाद मरीजों को 30 मिनट तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाता है। दवा की पर्याप्त उपलब्धता है और इमरजेंसी किट के साथ प्रशिक्षित स्टाफ तैनात हैं। सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दूसरी और तीसरी तिमाही की उन महिलाओं को चिह्नित करें, जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है। इस मिशन में पिरामल फाउंडेशन सामुदायिक स्तर पर जागरूकता फैला रहा है। फाउंडेशन के प्रतिनिधि दीपक मिश्रा और जयंत चौधरी ने बताया कि वे परिवारों को जागरूक किया जा रहा हैं। जिससे महिलाएं उपचार से डरें नहीं और समय पर जांच कराएं। इसके लिए मीडिया का भी बहुत सहयोग मिल रहा है। इसके अलावा धर्मगुरु, स्थानीय जन प्रतिनिधि ,पंचायत प्रतिनिधि, जीविका दीदी और स्थानीय एनजीओ से सहयोग लेकर इसे जन आंदोलन बनाया जाएगा।सबके सहयोग से ही एनीमिया मुक्त बेगूसराय का सपना सच होगा। सदर अस्पताल के साथ-साथ यह सेवा अनुमंडल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध होगी। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर चुनौती जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा (DIO) ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया एक गंभीर चुनौती है। कई बार आयरन की गोलियां (IFA) लेने के बावजूद महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर नहीं सुधरता। FCM तकनीक एक गेम-चेंजर साबित होगी, क्योंकि यह सीधे रक्तप्रवाह में आयरन पहुंचाती है। गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि FCM इंजेक्शन की उपलब्धता ग्राउंड लेवल पर हो। टीकाकरण और नियमित प्रसव पूर्व जांच के दौरान ऐसी महिलाओं की स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है। उच्च जोखिम वाली गर्भधारण के मामलों को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इस पहल से न केवल प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आएगी, बल्कि जन्म लेने वाले शिशुओं के स्वास्थ्य में भी व्यापक सुधार होने की उम्मीद है। जिला स्वास्थ्य प्रबंधक (DHM) पंकज कुमार ने बताया कि जिले के स्टॉक में दवा की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ किया गया है। सदर अस्पताल और अनुमंडल अस्पतालों में इसके लिए विशेष बेड और इमरजेंसी किट की व्यवस्था की गई है। जिससे किसी भी प्रतिकूल स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। हमारा लक्ष्य हर उस गर्भवती महिला तक पहुंचना है जो एनीमिया के कारण जोखिम में है।


