पूर्णिया में 5 महीने से फरार वांटेड साहिल गिरफ्तार:तारापीठ से पूजा कर लौट रहा था, एसटीएफ-पुलिस ने पकड़ा; फायरिंग में बच्चे को लगी थी लगी

पूर्णिया में 5 महीने से फरार वांटेड साहिल गिरफ्तार:तारापीठ से पूजा कर लौट रहा था, एसटीएफ-पुलिस ने पकड़ा; फायरिंग में बच्चे को लगी थी लगी

पूर्णिया में फायरिंग मामले में फरार वांटेड साहिल सौरभ को एसटीएफ और मरंगा थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वो पिछले 5 महीने से फरार था। साहिल को बंगाल-बिहार सीमा के पास टुन्नीदिघी इलाके से पकड़ा गया। वो तारापीठ में पूजा कर लौट रहा था और खुद को सुरक्षित मान रहा था, लेकिन पुलिस पहले से उसकी तलाश में लगी थी। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस की शाम 2 गुट आमने-सामने आ गए थे। गाड़ी साइड देने को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों तरफ से करीब 30 राउंड गोलियां चलीं। इस अंधाधुंध फायरिंग में सड़क किनारे सब्जी खरीदने जा रहे 14 साल के एक मासूम बच्चे को गोली लग गई थी। बच्चा घायल होकर गिर पड़ा था। लोग दुकानें छोड़कर भागने लगे। कई घरों में लोग डर के मारे दरवाजे बंद कर दुबक गए। पुरानी दुश्मनी भी सामने आ रही पुलिस जांच में सामने आया है कि झगड़ा सिर्फ साइड मांगने का नहीं था। इसके पीछे इलाके में दबदबा और जमीन के कारोबार की पुरानी दुश्मनी छिपी हुई थी। साहिल सौरभ हाल के दिनों में जमीन के धंधे में सक्रिय था और अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। इसी बात को लेकर पुराने विरोधी आमने-सामने आ गए। साहिल सौरभ का परिवार पहले से ही विवादों में रहा है। उसके पिता बुच्चन यादव मोस्ट वांटेड थे। उनकी हत्या से पहले कई बड़े मामलों में उनका नाम आ चुका था। पिता की मौत के बाद साहिल ने परिवार की विरासत संभालने की कोशिश की। मां अभी मुखिया हैं और पत्नी प्रखंड उपप्रमुख। राजनीति में पकड़ और प्रशासनिक पहुंच के कारण साहिल खुद को ताकतवर समझने लगा था। बताया जाता है कि इसी भरोसे वो खुलेआम घूम रहा था। साहिल सौरभ का पहले से आपराधिक इतिहास है। एक बड़े हत्याकांड के मामले में वो जेल जा चुका है। उस समय उस पर इनाम भी घोषित किया गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने खुद को बदला हुआ दिखाने की कोशिश की, लेकिन फिर से विवादों में फंस गया। पूर्णिया में फायरिंग मामले में फरार वांटेड साहिल सौरभ को एसटीएफ और मरंगा थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वो पिछले 5 महीने से फरार था। साहिल को बंगाल-बिहार सीमा के पास टुन्नीदिघी इलाके से पकड़ा गया। वो तारापीठ में पूजा कर लौट रहा था और खुद को सुरक्षित मान रहा था, लेकिन पुलिस पहले से उसकी तलाश में लगी थी। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस की शाम 2 गुट आमने-सामने आ गए थे। गाड़ी साइड देने को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों तरफ से करीब 30 राउंड गोलियां चलीं। इस अंधाधुंध फायरिंग में सड़क किनारे सब्जी खरीदने जा रहे 14 साल के एक मासूम बच्चे को गोली लग गई थी। बच्चा घायल होकर गिर पड़ा था। लोग दुकानें छोड़कर भागने लगे। कई घरों में लोग डर के मारे दरवाजे बंद कर दुबक गए। पुरानी दुश्मनी भी सामने आ रही पुलिस जांच में सामने आया है कि झगड़ा सिर्फ साइड मांगने का नहीं था। इसके पीछे इलाके में दबदबा और जमीन के कारोबार की पुरानी दुश्मनी छिपी हुई थी। साहिल सौरभ हाल के दिनों में जमीन के धंधे में सक्रिय था और अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। इसी बात को लेकर पुराने विरोधी आमने-सामने आ गए। साहिल सौरभ का परिवार पहले से ही विवादों में रहा है। उसके पिता बुच्चन यादव मोस्ट वांटेड थे। उनकी हत्या से पहले कई बड़े मामलों में उनका नाम आ चुका था। पिता की मौत के बाद साहिल ने परिवार की विरासत संभालने की कोशिश की। मां अभी मुखिया हैं और पत्नी प्रखंड उपप्रमुख। राजनीति में पकड़ और प्रशासनिक पहुंच के कारण साहिल खुद को ताकतवर समझने लगा था। बताया जाता है कि इसी भरोसे वो खुलेआम घूम रहा था। साहिल सौरभ का पहले से आपराधिक इतिहास है। एक बड़े हत्याकांड के मामले में वो जेल जा चुका है। उस समय उस पर इनाम भी घोषित किया गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने खुद को बदला हुआ दिखाने की कोशिश की, लेकिन फिर से विवादों में फंस गया।  

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