Walking Barefoot reduce Inflammation: क्या आप भी हैं शरीर की सूजन से परेशान? नंगे पांव चलने से बदल जाएगी आपकी सेहत

Walking Barefoot reduce Inflammation: क्या आप भी हैं शरीर की सूजन से परेशान? नंगे पांव चलने से बदल जाएगी आपकी सेहत

Walking Barefoot Reduces Inflammation: आजकल लोग जरा-सी तबीयत बिगड़ते ही महंगे सप्लीमेंट्स, दवाइयां और डाइट प्लान ढूंढने लगते हैं। लेकिन सेहत ठीक रखने का सबसे आसान तरीका भूल जाते हैं। घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पांव चलना, शरीर की सूजन कम करने के लिए महंगे सप्लीमेंट से भी ज्यादा असरदार हो सकता है। इससे शरीर के फ्री रेडिकल्स न्यूट्रल हो जाते हैं और नर्वस सिस्टम ठीक रहता है।

जब हम जूते उतारकर ठंडी जमीन पर पांव रखते हैं, तो शरीर को एक अलग सुकून मिलता है। इससे कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी लाइफस्टाइल सिर्फ दवाइयों या फैंसी डाइट से नहीं बनती, कई बार बस जूते उतारना ही काफी होता है। आइए जानते हैं कि कैसे आप नंगे पांव गार्डन में चलकर शरीर और दिमाग दोनों को नेचुरली रीसेट कर सकते हैं।

क्या है ग्राउंडिंग?

ग्राउंडिंग या अर्थिंग का मतलब है नंगे पांव चलना, ताकि हमारा शरीर जमीन के संपर्क में आ सके। घास, मिट्टी या रेत जैसी प्राकृतिक जगह पर चलना एक बहुत ही सरल प्रक्रिया है, लेकिन इसका असर सेहत पर गहरा पड़ता है। ग्राउंडिंग से शरीर में सूजन कम हो सकती है।

ग्राउंडिंग के फायदे-

  • शरीर में सूजन और दर्द कम होता है।
  • नींद बेहतर होती है।
  • तनाव और घबराहट कम होते हैं।
  • कोर्टिसोल लेवल घटता है।
  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
  • दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
  • पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं और पोश्चर सुधरता है।

कैसे शुरू करें ग्राउंडिंग-

  • रोज 15–30 मिनट घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पांव चलें।
  • अगर चलना संभव नहीं हो तो जमीन पर बैठें।
  • घर के अंदर चाहें तो ग्राउंडिंग मैट या शीट इस्तेमाल कर सकते हैं।

पैरों की सूजन कम करने के उपाय-

  • कम से कम 30 मिनट की सैर करें।
  • गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर 15 मिनट बैठें।
  • खाने में ऊपर से नमक और प्रोसेस्ड फूड लेना बंद करें।

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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