अयोध्या में 30 साल से रेल फाटक का इंतजार:सांसद अवधेश प्रसाद पहुंचे मरुई सहाय सिंह, अंडरपास का दिया भरोसा

अयोध्या में 30 साल से रेल फाटक का इंतजार:सांसद अवधेश प्रसाद पहुंचे मरुई सहाय सिंह, अंडरपास का दिया भरोसा

अयोध्या जिले के बीकापुर क्षेत्र में अयोध्या-प्रयागराज रेल खंड पर स्थित मरुई सहाय सिंह गांव में वर्षों से लंबित रेल फाटक की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद रविवार को गांव पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले वे सांसद आवास जाकर इस गंभीर समस्या से अवगत करा चुके थे। इसके बाद सांसद ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि रेलवे क्रॉसिंग 23/10 पर फाटक न होने से उन्हें रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि मरुई सहाय सिंह क्रॉसिंग पर अंडरपास का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। यह लंबे समय से चली आ रही समस्या है, जिसका समाधान अब प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले जानकारी होती तो इस दिशा में कार्रवाई पहले ही शुरू हो जाती। मौके से ही सांसद ने रेलवे के डीआरएम से फोन पर बातचीत कर समस्या से अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों से जल्द से जल्द अंडरपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। सांसद ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि इस समस्या के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। 30 साल से झेल रहे परेशानी मरुई सहाय सिंह गांव मलेथू कनक रेलवे स्टेशन और खजुराहट के बीच स्थित है। यहां रेल फाटक न होने के कारण ग्रामीणों को पिछले 30 वर्षों से लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ता है। आपात स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को 5 से 7 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय पर सहायता पहुंचना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की जान पर बन आती है गांव के सैकड़ों स्कूली बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करते हैं। इसके अलावा किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। चुनाव बहिष्कार की चेतावनी समस्या का समाधान न होने से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आने वाले चुनावों का बहिष्कार करेंगे। हालांकि सांसद के दौरे से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन वे अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी कार्रवाई देखना चाहते हैं।

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