कटनी। शहर की वृंदावन कॉलोनी में इस बार नवरात्रि का पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश भी लेकर आया। कॉलोनीवासियों ने मिलकर एक अभिनव पहल करते हुए भंडारे को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाया और स्टील के बर्तनों का उपयोग कर एक मिसाल पेश की। यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर सराही जा रही है, बल्कि अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बनती जा रही है।
इस विशेष आयोजन का मार्गदर्शन पंडित श्री चंद्रभूषण दुबे द्वारा किया गया, जबकि कॉलोनी के निवासियों ने एकजुट होकर इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भंडारे में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को भोजन स्टील की थालियों में परोसा गया और पानी स्टील के गिलासों में दिया गया। इसके लिए कुल 251 स्टील थालियां, 251 गिलास और पर्याप्त संख्या में चम्मच खरीदे गए। इस व्यवस्था ने एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और थर्माकोल के बर्तनों के उपयोग को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम
आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में अक्सर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का उपयोग होता है, जो बाद में कचरे के रूप में पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। प्लास्टिक न केवल भूमि और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि जीव-जंतुओं के लिए भी खतरा बनता है। ऐसे में इस तरह की पहल प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन सकती है। वृंदावन कॉलोनी के निवासियों ने इस पहल को पूरी जिम्मेदारी और उत्साह के साथ अपनाया। भंडारे के दौरान अनुशासन और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक रूप से भी सफल रहा।

श्रद्धालुओं ने की सराहना
भंडारे में शामिल हुए श्रद्धालुओं ने इस अनोखी पहल की खुलकर सराहना की। कई लोगों ने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन अन्य स्थानों पर भी किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि यदि छोटे स्तर पर भी ऐसे प्रयास किए जाएं, तो बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण संभव है।
सामूहिक सहयोग से बना सफल आयोजन
इस सराहनीय पहल को सफल बनाने में कॉलोनी के कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें विकास श्रीवास्तव, विनोद कुमार चतुर्वेदी, ओंकार गौतम, राघवेंद्र शर्मा, दिनेश पाली, फरबन सक्सेना, प्रशांत, सौरभ भौमिक, रमेश पांडे, पवन कुमार पांडे, योगेंद्र सिंह, रामजी बर्मन सहित सभी निवासियों का विशेष योगदान रहा। सभी ने मिलकर यह साबित किया कि सामूहिक प्रयासों से सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
समाज के लिए प्रेरणास्रोत
वृंदावन कॉलोनी की यह पहल यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि जागरूकता और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। यदि समाज मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाए, तो बड़ा बदलाव संभव है। इस तरह के प्रयास न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने में सहायक होंगे। नवरात्रि जैसे पावन अवसर पर की गई यह पहल धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है। अब आवश्यकता है कि इस पहल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, ताकि प्लास्टिक मुक्त समाज की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा सकें।


