भास्कर न्यूज | जालंधर शिक्षा विभाग संघर्ष समिति पंजाब के नेतृत्व में देशभगत यादगारी हॉल में हजारों की संख्या में एकत्रित अध्यापकों और कर्मचारियों ने एक कन्वेंशन आयोजित किया। इसके बाद उन्होंने कैबिनेट मंत्री महिंदर भगत के घर की ओर रोष मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। इस मौके राज्य के नेताओं हरजिंदर पाल सिंह पन्नू, बलजिंदर सिंह ढालीवाल, गुरप्रीत सिंह खटड़ा और धर्मजीत सिंह ढिल्लों की संयुक्त अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने जबरन लागू किए गए टेट को खत्म करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, 16 प्रतिशत डीए की किश्तें जारी करने, बंद किए गए ग्रामीण व अन्य भत्ते बहाल करने, छठे वेतन आयोग की त्रुटियां दूर करने, 200 रुपये जंजुआ टैक्स खत्म करने, सातवां वेतन आयोग लागू करने, एसीपी लागू कर अगली ग्रेड देने, पंजाब स्केल लागू करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, बीपीईओ दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने, 245 कॉमर्स लेक्चरर की रिवर्जन रोकने, क्लर्क टाइप टेस्ट में छूट देने, गैर-शैक्षणिक व ऑनलाइन कार्य तथा बीएलओ ड्यूटी बंद करने और विभागीय टेस्ट खत्म करने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार संघर्ष को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है और चेतावनी दी कि अगर डराने-धमकाने का रवैया बंद नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री ने उनकी मांगों को लेकर बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा। मौके पर पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार ने शिक्षा मंत्री से बातचीत कर 30 मार्च को सचिवालय में बैठक तय करवाई और इसका लिखित पत्र भी दिया।


