Vitamin D: आपने कई लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि सुबह उठते ही हमें बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है और दोपहर तक तो शरीर पूरी तरह से टूट जाता है। अपनी इस समस्या का समाधान भी फिर वे खुद ही बता देते हैं कि ऐसा उनके साथ नींद पूरी नहीं होने के कारण हो रहा है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है।
आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसका सबसे बड़ा कारण विटामिन D की कमी हो सकता है। इसे ‘सनशाइन विटामिन’ भी कहा जाता है, जो न केवल हड्डियों बल्कि हमारे शरीर की ऊर्जा कोशिकाओं को भी सक्रिय रखता है। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और कैसे इससे बचा जा सकता है।
विटामिन D और शरीर की थकान का संबंध?(Vitamin D Deficiency)
विटामिन D का मुख्य काम शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण (Absorption) को नियंत्रित करना है। लेकिन इसका एक और बड़ा काम ऊर्जा बनाए रखना भी है। विटामिन D हमारी कोशिकाओं के उस हिस्से को शक्ति देता है जिसे ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ कहते हैं। यह शरीर का पावरहाउस है जो ऊर्जा बनाता है। यदि विटामिन D कम है, तो यह पावरहाउस ठीक से काम नहीं करता और शरीर जल्दी थक जाता है।
विटामिन D की कमी के कारण क्या हैं?(Vitamin D Deficiency Cause)
- धूप में कम बैठना।
- सनस्क्रीन का प्रयोग बहुत ज्यादा करना।
- खानपान में विटामिन D युक्त पदार्थों की कमी।
- बहुत ज्यादा प्रदूषण के संपर्क में रहना।
शरीर में विटामिन D की कमी के लक्षण?(Vitamin D Deficiency Symptoms)
- दोपहर में बहुत ज्यादा थकान होना।
- हड्डियों में लगातार दर्द होना।
- मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द महसूस होना।
- बिना किसी बड़ी वजह के चिड़चिड़ापन रहना।
विटामिन D की कमी से बचने के उपाय?(Vitamin D Deficiency Prevention)
- सुबह 10 से 12 बजे के बीच कुछ देर धूप में बैठें।
- अपनी डाइट में पनीर, सोया उत्पाद, अंडे की जर्दी और फोर्टिफाइड अनाज शामिल करें।
- साल में कम से कम एक बार विटामिन D की जांच (25-hydroxy vitamin D test) जरूर करवाएं।
- डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स या विटामिन D के कैप्सूल लेना शुरू करें।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


