लोहरदगा|विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने श्रीरामोत्सव पखवाड़ा मनाते हुए नगर क्षेत्र में विहिप जिलाध्यक्ष रितेश कुमार, ज़िला संगठन मंत्री कार्तिक विश्वकर्मा, बजरंग दल िजला संयोजक पवन प्रजापति, सह संयोजक बिटू कुमार व केंद्रीय महावीर मंडल जिलाध्यक्ष विपुल तमेड़ा ने नगर के विभिन्न अखाड़ों का भ्रमण कर श्रीरामोत्सव के बारे में बताने का कार्य किया। साथ ही श्रीराम के धरती अवतरण के उद्देश्यों को रखा। वहीं केंद्रीय महावीर मंडल अध्यक्ष ने कहा कि जब जब धरती में पाप बढ़ता है और धर्म का पतन होने लगता है तब तब धर्म के अधिष्ठापन व पापियों के नाश के लिए धरती में ईश्वरीय अवतरण होता है। कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए क्योंकि उन्होंने अपने पिता का वचन पूरा करने के लिए चौदह वर्षों का वनवास पूरा किया। साथ ही ऋर्षियों के आश्रम की रक्षा के लिए राक्षसों का नाश भी किया। परस्त्री पर गलत नज़र रखने वाले रावण का भी वध किया। माता शबरी के प्रतीक्षा को पूरा करते हुए उनके झूठे बैर भी खाए। साथ ही धर्म के रास्ते आने वाली हर दुष्ट शक्तियों का संहार किया। आज सनातन के हर युवा पीढ़ी, बच्चे, बुजुर्ग सभी को धर्म को जानने समझने व इसके प्रति समर्पण की ज़रूरत है। लोहरदगा|विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने श्रीरामोत्सव पखवाड़ा मनाते हुए नगर क्षेत्र में विहिप जिलाध्यक्ष रितेश कुमार, ज़िला संगठन मंत्री कार्तिक विश्वकर्मा, बजरंग दल िजला संयोजक पवन प्रजापति, सह संयोजक बिटू कुमार व केंद्रीय महावीर मंडल जिलाध्यक्ष विपुल तमेड़ा ने नगर के विभिन्न अखाड़ों का भ्रमण कर श्रीरामोत्सव के बारे में बताने का कार्य किया। साथ ही श्रीराम के धरती अवतरण के उद्देश्यों को रखा। वहीं केंद्रीय महावीर मंडल अध्यक्ष ने कहा कि जब जब धरती में पाप बढ़ता है और धर्म का पतन होने लगता है तब तब धर्म के अधिष्ठापन व पापियों के नाश के लिए धरती में ईश्वरीय अवतरण होता है। कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए क्योंकि उन्होंने अपने पिता का वचन पूरा करने के लिए चौदह वर्षों का वनवास पूरा किया। साथ ही ऋर्षियों के आश्रम की रक्षा के लिए राक्षसों का नाश भी किया। परस्त्री पर गलत नज़र रखने वाले रावण का भी वध किया। माता शबरी के प्रतीक्षा को पूरा करते हुए उनके झूठे बैर भी खाए। साथ ही धर्म के रास्ते आने वाली हर दुष्ट शक्तियों का संहार किया। आज सनातन के हर युवा पीढ़ी, बच्चे, बुजुर्ग सभी को धर्म को जानने समझने व इसके प्रति समर्पण की ज़रूरत है।


