ट्रेजरी घोटाला पर झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने विपक्ष के आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है। कहा-ट्रेजरी से अवैध निकासी 14 साल पहले भाजपा की सरकारों में शुरू हुई। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में खूब फला-फूला। तब किसी ने गड़बड़ी नहीं पकड़ी। जनता के पाई-पाई का हिसाब किताब रखने वाले मुख्यमंत्री ने हिम्मत दिखाई और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। पूरे मामले को जनता के सामने लाने वाली सरकार पर आरोप लगाने से पहले भाजपा नेताओं को जान लेना चाहिए कि हेमंत सोरेन पूरा सच सामने लाएंगे। जल्द भाजपा के कई नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब होगा। बस थोड़ा इंतजार कीजिए। जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। वहीं, पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान में हुई देरी तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से है, जिसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा।
भाजपा के बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक-2026 में झारखंड देश में तीसरे स्थान पर है। वहीं, भाजपा शासित बड़े राज्यों का प्रदर्शन कमजोर है। ऐसे में वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप राजनीति से प्रेरित है। पॉलि टिकल रिपोर्टर| रांची भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने शनिवार को प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन पर सवाल उठाया। प्रतुल ने कहा कि 26 वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी महीने के 11वें दिन भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। सरकार के वेतन पर सीधे तौर पर 2,35,930 अधिकारी और कर्मचारी हैं। संविदा कर्मी और आउटसोर्स कमी की संख्या लगभग 40,000 से 45,000 के आसपास है। यानी कुल 2,75,000 कर्मियों को 11 तारीख बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला है। करीब 15 लाख लोग इन वेतन कर्मियों पर आश्रित हैं। इनके घरों में राशन के लाले पड़ गए हैं। वे न तो बच्चों की फीस दे पा रहे हैं और न ही ईएमआई भर पा रहे हैं। प्रतुल ने सरकार से सवाल किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर झारखंड सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने जा रही या किसी एडवांस का इंतजार कर रही है? प्रतुल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के लिए करीब 100 करोड़ के बजट का आवंटन कर दिया। इसका टेंडर भी निकल गया। मूल भवन की कीमत 67 करोड़ है। इंटीरियर और डेकोरेशन और टेंडर के लागत में वृद्धि को नहीं जोड़ा गया है। यानी स्विमिंग पूल, जकूजी, ऑटोमैटिक मसाज रूम वाले 100 करोड़ के शीश महल के लिए सरकार के पास पैसा है। रांची। विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर झारखंड में सामने आ रहे ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई या न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू में अवैध निकासी के संकेत मिले हैं और शुरुआती आकलन में 35 करोड़ से अधिक की राशि का अनुमान है। मरांडी के अनुसार बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को अकेला मुख्य आरोपी मानना अविश्वसनीय है और इससे बड़े नेटवर्क व उच्चस्तरीय मिलीभगत की आशंका बनती है। उन्होंने वेतन भुगतान में कथित अनियमित हस्तांतरण और ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ की जांच, साथ ही जैप-आईटी की भूमिका की पड़ताल की जरूरत बताई। पत्र में कहा गया कि पुलिस विभाग से जुड़ी निकासी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। रांची| ट्रेजरी घोटाला पर झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने विपक्ष के आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है। कहा-ट्रेजरी से अवैध निकासी 14 साल पहले भाजपा की सरकारों में शुरू हुई। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में खूब फला-फूला। तब किसी ने गड़बड़ी नहीं पकड़ी। जनता के पाई-पाई का हिसाब किताब रखने वाले मुख्यमंत्री ने हिम्मत दिखाई और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। पूरे मामले को जनता के सामने लाने वाली सरकार पर आरोप लगाने से पहले भाजपा नेताओं को जान लेना चाहिए कि हेमंत सोरेन पूरा सच सामने लाएंगे। जल्द भाजपा के कई नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब होगा। बस थोड़ा इंतजार कीजिए। जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। वहीं, पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान में हुई देरी तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से है, जिसे जल्द ही दूर कर लिया जाएगा।
भाजपा के बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक-2026 में झारखंड देश में तीसरे स्थान पर है। वहीं, भाजपा शासित बड़े राज्यों का प्रदर्शन कमजोर है। ऐसे में वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप राजनीति से प्रेरित है। पॉलि टिकल रिपोर्टर| रांची भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने शनिवार को प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन पर सवाल उठाया। प्रतुल ने कहा कि 26 वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी महीने के 11वें दिन भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। सरकार के वेतन पर सीधे तौर पर 2,35,930 अधिकारी और कर्मचारी हैं। संविदा कर्मी और आउटसोर्स कमी की संख्या लगभग 40,000 से 45,000 के आसपास है। यानी कुल 2,75,000 कर्मियों को 11 तारीख बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला है। करीब 15 लाख लोग इन वेतन कर्मियों पर आश्रित हैं। इनके घरों में राशन के लाले पड़ गए हैं। वे न तो बच्चों की फीस दे पा रहे हैं और न ही ईएमआई भर पा रहे हैं। प्रतुल ने सरकार से सवाल किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर झारखंड सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने जा रही या किसी एडवांस का इंतजार कर रही है? प्रतुल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के लिए करीब 100 करोड़ के बजट का आवंटन कर दिया। इसका टेंडर भी निकल गया। मूल भवन की कीमत 67 करोड़ है। इंटीरियर और डेकोरेशन और टेंडर के लागत में वृद्धि को नहीं जोड़ा गया है। यानी स्विमिंग पूल, जकूजी, ऑटोमैटिक मसाज रूम वाले 100 करोड़ के शीश महल के लिए सरकार के पास पैसा है। रांची। विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर झारखंड में सामने आ रहे ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई या न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू में अवैध निकासी के संकेत मिले हैं और शुरुआती आकलन में 35 करोड़ से अधिक की राशि का अनुमान है। मरांडी के अनुसार बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को अकेला मुख्य आरोपी मानना अविश्वसनीय है और इससे बड़े नेटवर्क व उच्चस्तरीय मिलीभगत की आशंका बनती है। उन्होंने वेतन भुगतान में कथित अनियमित हस्तांतरण और ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ की जांच, साथ ही जैप-आईटी की भूमिका की पड़ताल की जरूरत बताई। पत्र में कहा गया कि पुलिस विभाग से जुड़ी निकासी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। रांची|


