Vinod Khanna Battled Two Different Types of Cancer: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना ने 2001 में फेफड़ों के कैंसर और 2010 में मूत्राशय के कैंसर से लड़ाई लड़ी। आध्यात्मिक साधना, ध्यान और समग्र उपचारों के माध्यम से वे दोनों बीमारियों से जंग जीत गए थे। लेकिन 2017 में 70 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। उन्होंने ‘कुर्बानी’, ‘मेरे अपने’, ‘अमर अकबर एंथोनी’, मेरा गांव मेरा देश, ‘दयावान’ और ‘दबंग’ जैसी फिल्मों में दमदार किरदार निभाए थे।

विनोद खन्ना ने झेले थे दो तरह के कैंसर (Vinod Khanna Battled Two Different Types of Cancer)
विनोद खन्ना ने दो शादी की थीं और उनकी दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने एक यूट्यूब वीडियो में बताया कि विनोद खन्ना ब्लैडर के कैंसर से पहले फेफड़ों के कैंसर से भी जूझ चुके थे। कविता खन्ना ने बताया कि विनोद ने 2001 में नार्मल हेल्थ चेकअप करवाया था, जिसमें डॉक्टर्स ने उनके फेफड़ों में कुछ धब्बे पाए। ये वो दौर था जब वो एक दिन में तकरीबन 40 से 80 सिगरेट पीते थे। डॉक्टरों ने उन्हें फेफड़ों का कैंसर बताया और सर्जरी की सलाह दी, जिसमें उनके फेफड़े का आधा हिस्सा निकालना पड़ता। लेकिन सर्जरी करवाने से पहले विनोद और कविता ने अपने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर से सलाह ली। डॉक्टरों ने उन्हें चिकित्सा उपचार के साथ-साथ ब्रीदिंग एक्सरसाइज (श्वास व्यायाम), ध्यान और समग्र चिकित्सा पद्धतियों का अभ्यास करने की सलाह दी। विनोद ने ऋषिकेश के एक आश्रम में सुदर्शन क्रिया का अध्ययन किया और साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी अपनाया।

इन सबके के बाद जब जर्मनी और लंदन में विनोद खन्ना के मेडिकल चेकअप किए गए तो डॉक्टर्स हैरान थे क्योंकि उनका फेफड़ों का कैंसर पूरी तरह से खत्म हो गया था। इसके आगे कविता ने बताया कि डॉक्टरों को यह विश्वास करना मुश्किल था कि फेफड़ों का कैंसर पूरी तरह से गायब हो गया है, यह घटना उनके जीवन का एक बड़ा अचीववमेंट था।
जब डॉक्टर्स ने बोल दिया था कि टाइम कम है
मगर किस्मत अपना अलग रंग दिखा रही थी। साल 2010 में विनोद खन्ना को मूत्राशय के कैंसर का पता चला। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनके पास सिर्फ दो साल हैं, और इसकी संभावना भी 25 प्रतिशत ही है। विनोद खन्ना ने इसके लिए भी आध्यात्म की शरण ली और उसका पालन करते हुए दूसरी बार आश्रम में पंचकर्म उपचार और चिकित्सा करवाई। दो साल बाद अमेरिका में फिर से स्कैन किया गया, जिसकी रिपोर्ट से पता चला कि उनमें कैंसर का कोई अंश नहीं बचा था।

कविता खन्ना ने ये भी बताया कि ठीक होने के बाद विनोद को शराब छोड़ने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपनी सेहत पर बहुत ध्यान दिया, डॉक्टर्स की हर सलाह को फॉलो किया, मगर बावजूद इसके साल 2017 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे हैंडसम हीरो ही नहीं थे, बल्कि एक अच्छे पॉलिटीशियन भी थे. इन सबके अलावा उनको इ अच्छे इंसान के रूप में भी याद किया जाता है. उन्होंने गंभीर बीमारियों के खिलाफ जिंदगी की जंग भी जीती जो हमेशा उनके चाहने वालों को प्रेरित करेगी।


