भास्कर न्यूज|डुमरी कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और समाज एकजुट हो, तो बड़े से बड़े काम आसान हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है डुमरी प्रखंड के लुचतपाठ गांव के ग्रामीणों ने प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जब सरकारी फाइलों और उपेक्षा की भेंट चढ़ गई, तो ग्रामीणों ने प्रशासनिक मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही पसीना बहाकर उसे चलने लायक बना दिया। बाबा टांगीनाथ धाम से लुचतपाठ गांव तक जाने वाली लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले लंबे समय से बदहाली का दंश झेल रही थी। विशेषकर करीब 500 मीटर का एक हिस्सा इतना जर्जर हो चुका था कि वहां सड़क और गड्ढों के बीच का अंतर समाप्त हो गया था। बरसात के बाद तो स्थिति और भी भयावह हो गई। सड़क पर जगह-जगह जलजमाव और जानलेवा गड्ढों के कारण स्थिति यह थी कि राहगीरों और स्कूली बच्चों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता था। बाइक सवारों के लिए चुनौती: आए दिन बाइक फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें आ रही थीं। मरीजों को अस्पताल ले जाना एक जोखिम भरा कार्य बन गया था। प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लिया। लुचतपाठ के दर्जनों ग्रामीणों ने रविवार को कुदाल, फावड़े और टोकरी उठाकर खुद ही सड़क की मरम्मत शुरू कर दी। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बोल्डर और मुरम (लाल मिट्टी) का इंतजाम किया और सड़क के सबसे खराब हिस्सों की भराई की। इस पुनीत कार्य में अनमोल टोप्पो, एडिशन कुजूर, संतोष टोप्पो, अमर टोप्पो, सुशांत टोप्पो, मृत्युंजय टोप्पो, गोस्नर तिर्की, संजय लकड़ा, गेंदा मुंडा, मनोरंजन लकड़ा, सलीम टोप्पो समेत बड़ी संख्या में युवाओं और बुजुर्गों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। सड़क को अस्थायी रूप से दुरुस्त करने के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष भी दिखा। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने जो किया है, वह केवल एक अस्थायी व्यवस्था है ताकि लोग गिरकर चोटिल न हों। ”हमने श्रमदान करके सड़क को फिलहाल चलने लायक तो बना दिया है, लेकिन मिट्टी और मुरम पहली बारिश में फिर बह सकते हैं। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस 5 किलोमीटर लंबी सड़क का जल्द से जल्द टेंडर कराकर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। टांगीनाथ धाम जैसे धार्मिक स्थल के पास होने के कारण इस सड़क का महत्व और भी बढ़ जाता है।


