बेगूसराय में कुख्यात सीरियल किलर विकास को गुरुवार को ADJ-3 ब्रजेश कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौत की (फांसी) सजा सुनाई है। 2012 में भूमि विवाद के कारण चाचा अरूण सिंह की हत्या से शुरू हुआ खुनी खेल क्रमिक रूप से चाची गवाह मणि देवी, भाई कुणाल,भाभी कंचन देवी, भतीजी सोनम सहित पांच लोगों की हत्या ने इस कांड को ‘रेयर आंफ द रेयरेस्ट’ बना दिया। यह सीरियल किलर पांच लोगों की हत्या के साथ न्यायपालिका के साथ धोखाधड़ी, फर्जी जमानत और कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की ओर से दाखिल पटना में फर्जीवाड़ा के अलग केस से भी जुड़ा है। जिसमें इनके मददगार पर मुकदमा पटना में चल रहा है। 18 नवंबर 2012 में बेगूसराय शहर से सटे मचहा गांव में विकास कुमार ने अपने चाचा अरूण कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद 2013 में जब पटना उच्च न्यायालय ने उसे जमानत देने से इंकार कर दिया तो फर्जीवाड़ा कर बेल लेते हुए वह 17 अक्टूबर 2014 को बाहर आ गया। लेकिन फर्जीवाड़ा का मामला न्यायालय के संज्ञान में आ गया। पटना उच्च न्यायालय ने इसका संज्ञान लेते हुए 29 अप्रैल 2015 को सीबीआई को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। हत्यारा विकास यहीं नहीं रुका। जून 2017 में अपनी चाची मणी देवी की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह अपने पति अरुण सिंह के केस में गवाह थी। उसके बाद से लगातार फरार रहकर अपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा। 2019 की दीपावली की रात उसने अपने भाई कुणाल सिंह, भाभी कंचन देवी और भतीजी सोनम की सामूहिक हत्या कर दी। गोली खत्म होने से भतीजे की जान बच गई एक मात्र सामूहिक हत्या का चश्मदीद गवाह भतीजा शिवम इसलिए बच गया, क्योंकि हत्यारे की गोली खत्म हो गई थी। रात में वह बगल के गांव में रुका और उसके बाद वह ससुराल के रास्ते फरार हो गया। लेकिन तत्कालीन एसपी अवकाश कुमार, एएसपी अमृतेश कुमार एवं पुलिस निरीक्षक विवेक भारती की टीम ने हत्यारे को चार दिनों के बाद देवघर से गिरफ्तार कर लिया था। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर बताते हैं कि शायद उस समय की घटना में बेहतरीन पुलिसिंग, अनुसंधान ,साक्ष्य संकलन का ही परिणाम है कि सीरियल किलर विकास को अब लगातार सजा हो रही है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने पिछले दिनों विकास को हत्या का दोषी पाया। हत्यारे के वहशीपन और उसके मानसिक दशा को देखते हुए ऐतिहातन न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियुक्त की जेल में रहते ही फांसी की सजा सुनाई। अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने इस केस में हत्या के प्रत्यक्ष गवाह शिवम सहित 6 लोगों की गवाही कराई। यह केस बेहतरीन अनुसंधान, क्रमिक कड़ियों को जोड़ता अभियोजन साक्ष्य तथा न्यायालय में साक्ष्यों के प्रस्तुतीकरण का बेहतरीन उदाहरण के साथ न्यायालय का न्याय के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले, अनुसंधान तथा साक्ष्यों के प्रस्तुतीकरण के बीच समन्वय को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। सिरियल किलर का अंतिम दांव बेकार सीरियल किलर विकास अपने पांच परिजनों की लगातार हत्या करने के बाद भी न्यायिक निर्णय से पहले मानसिक रूप से सक्रिय, शातिर और षड्यंत्रकारी बना हुआ था। फर्जी बेल के कारण सीबीआई में मामला रहने से वह बेऊर जेल पटना के विशेष सेल में काराधीन है। उसने पिछले साल 18 अक्टूबर को न्यायालय से फैसले के समय सदेह उपस्थित होने की इच्छा जाहिर कर शातिर दिमाग का परिचय दिया। शायद उसके शातिर दिमाग में अभी भी बहुत कुछ चल रहा था। इस इच्छा के अनुपालन में एडीजे- तृतीय ने करीब दो माह तक यानी 7 नवंबर 2025, 14 नवंबर 2025, 2 दिसंबर 2025, 5 जनवरी 2026, 16 जनवरी 2026, 6 फरवरी 2026 एवं 11/फरवरी 2026 को करीब आठ तिथियों तक फैसले को लंबित करवाया। इस बीच बेगूसराय एवं बेऊर जेल के कारा अधीक्षक भी शायद उसके स्वभाव और चाल को समझ गए। क्योंकि वह सामान्य स्थिति में नहीं था। उसके शातिर दिमाग में अंतिम दम तक कुछ खास चल रहा था। इस बात को जानकर गुरुवार को न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई है। हर किसी की निगाहें इस बहुचर्चित हत्याकांड के फैसले पर टिकी हुई थी। फैसला आते ही सभी ने माना कि विकास ऐसी ही सजा का हकदार था। वारदात के बाद से घर बंद पड़ा है चलते हैं मचहा के उस घर की ओर जहां दिवाली के जश्न के बीच एक घर में ही तीन-तीन लाश से गिरा दी गई थी। कुणाल सिंह का वह घर 28 अक्टूबर 2019 से बंद पड़ा हुआ है। उस घर में जाना तो दूर, घर की ओर देखना भी लोग मुनासिब नहीं समझते हैं। कुणाल सिंह के दोनों बेटे भी घटना के दूसरे दिन जो घर से निकले तो आज तक वहां लौटकर नहीं गए, रिश्तेदार की सुरक्षा में हैं। जिससे वीरान पड़ा घर अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। गांव में कोई बोलने को तैयार नहीं न्यायालय का फैसला आने के बाद भास्कर की टीम जब गांव मचहा पहुंची। पहले तो कोई कुणाल सिंह का घर बताने के लिए तैयार नहीं हुआ। काफी पूछताछ करने के बाद वहां पहुंचे तो घर खंडहर दिख रहा था। प्रेस लिखी गाड़ी देखते ही आसपास के लोग अपने-अपने घरों में बंद हो गए। घर के एक दरवाजे पर ताला लगा हुआ था तो दूसरा गेट टूटा और खुला पड़ा था। जिस कमरे में हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वह आज भी वैसे ही पड़ा है। जैसे 27 अक्टूबर 2019 की रात था। सभी सामान बिखरे और कपड़ा उसी तरह रखा है। बेगूसराय में कुख्यात सीरियल किलर विकास को गुरुवार को ADJ-3 ब्रजेश कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौत की (फांसी) सजा सुनाई है। 2012 में भूमि विवाद के कारण चाचा अरूण सिंह की हत्या से शुरू हुआ खुनी खेल क्रमिक रूप से चाची गवाह मणि देवी, भाई कुणाल,भाभी कंचन देवी, भतीजी सोनम सहित पांच लोगों की हत्या ने इस कांड को ‘रेयर आंफ द रेयरेस्ट’ बना दिया। यह सीरियल किलर पांच लोगों की हत्या के साथ न्यायपालिका के साथ धोखाधड़ी, फर्जी जमानत और कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की ओर से दाखिल पटना में फर्जीवाड़ा के अलग केस से भी जुड़ा है। जिसमें इनके मददगार पर मुकदमा पटना में चल रहा है। 18 नवंबर 2012 में बेगूसराय शहर से सटे मचहा गांव में विकास कुमार ने अपने चाचा अरूण कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद 2013 में जब पटना उच्च न्यायालय ने उसे जमानत देने से इंकार कर दिया तो फर्जीवाड़ा कर बेल लेते हुए वह 17 अक्टूबर 2014 को बाहर आ गया। लेकिन फर्जीवाड़ा का मामला न्यायालय के संज्ञान में आ गया। पटना उच्च न्यायालय ने इसका संज्ञान लेते हुए 29 अप्रैल 2015 को सीबीआई को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। हत्यारा विकास यहीं नहीं रुका। जून 2017 में अपनी चाची मणी देवी की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह अपने पति अरुण सिंह के केस में गवाह थी। उसके बाद से लगातार फरार रहकर अपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा। 2019 की दीपावली की रात उसने अपने भाई कुणाल सिंह, भाभी कंचन देवी और भतीजी सोनम की सामूहिक हत्या कर दी। गोली खत्म होने से भतीजे की जान बच गई एक मात्र सामूहिक हत्या का चश्मदीद गवाह भतीजा शिवम इसलिए बच गया, क्योंकि हत्यारे की गोली खत्म हो गई थी। रात में वह बगल के गांव में रुका और उसके बाद वह ससुराल के रास्ते फरार हो गया। लेकिन तत्कालीन एसपी अवकाश कुमार, एएसपी अमृतेश कुमार एवं पुलिस निरीक्षक विवेक भारती की टीम ने हत्यारे को चार दिनों के बाद देवघर से गिरफ्तार कर लिया था। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर बताते हैं कि शायद उस समय की घटना में बेहतरीन पुलिसिंग, अनुसंधान ,साक्ष्य संकलन का ही परिणाम है कि सीरियल किलर विकास को अब लगातार सजा हो रही है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने पिछले दिनों विकास को हत्या का दोषी पाया। हत्यारे के वहशीपन और उसके मानसिक दशा को देखते हुए ऐतिहातन न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियुक्त की जेल में रहते ही फांसी की सजा सुनाई। अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने इस केस में हत्या के प्रत्यक्ष गवाह शिवम सहित 6 लोगों की गवाही कराई। यह केस बेहतरीन अनुसंधान, क्रमिक कड़ियों को जोड़ता अभियोजन साक्ष्य तथा न्यायालय में साक्ष्यों के प्रस्तुतीकरण का बेहतरीन उदाहरण के साथ न्यायालय का न्याय के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले, अनुसंधान तथा साक्ष्यों के प्रस्तुतीकरण के बीच समन्वय को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। सिरियल किलर का अंतिम दांव बेकार सीरियल किलर विकास अपने पांच परिजनों की लगातार हत्या करने के बाद भी न्यायिक निर्णय से पहले मानसिक रूप से सक्रिय, शातिर और षड्यंत्रकारी बना हुआ था। फर्जी बेल के कारण सीबीआई में मामला रहने से वह बेऊर जेल पटना के विशेष सेल में काराधीन है। उसने पिछले साल 18 अक्टूबर को न्यायालय से फैसले के समय सदेह उपस्थित होने की इच्छा जाहिर कर शातिर दिमाग का परिचय दिया। शायद उसके शातिर दिमाग में अभी भी बहुत कुछ चल रहा था। इस इच्छा के अनुपालन में एडीजे- तृतीय ने करीब दो माह तक यानी 7 नवंबर 2025, 14 नवंबर 2025, 2 दिसंबर 2025, 5 जनवरी 2026, 16 जनवरी 2026, 6 फरवरी 2026 एवं 11/फरवरी 2026 को करीब आठ तिथियों तक फैसले को लंबित करवाया। इस बीच बेगूसराय एवं बेऊर जेल के कारा अधीक्षक भी शायद उसके स्वभाव और चाल को समझ गए। क्योंकि वह सामान्य स्थिति में नहीं था। उसके शातिर दिमाग में अंतिम दम तक कुछ खास चल रहा था। इस बात को जानकर गुरुवार को न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई है। हर किसी की निगाहें इस बहुचर्चित हत्याकांड के फैसले पर टिकी हुई थी। फैसला आते ही सभी ने माना कि विकास ऐसी ही सजा का हकदार था। वारदात के बाद से घर बंद पड़ा है चलते हैं मचहा के उस घर की ओर जहां दिवाली के जश्न के बीच एक घर में ही तीन-तीन लाश से गिरा दी गई थी। कुणाल सिंह का वह घर 28 अक्टूबर 2019 से बंद पड़ा हुआ है। उस घर में जाना तो दूर, घर की ओर देखना भी लोग मुनासिब नहीं समझते हैं। कुणाल सिंह के दोनों बेटे भी घटना के दूसरे दिन जो घर से निकले तो आज तक वहां लौटकर नहीं गए, रिश्तेदार की सुरक्षा में हैं। जिससे वीरान पड़ा घर अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। गांव में कोई बोलने को तैयार नहीं न्यायालय का फैसला आने के बाद भास्कर की टीम जब गांव मचहा पहुंची। पहले तो कोई कुणाल सिंह का घर बताने के लिए तैयार नहीं हुआ। काफी पूछताछ करने के बाद वहां पहुंचे तो घर खंडहर दिख रहा था। प्रेस लिखी गाड़ी देखते ही आसपास के लोग अपने-अपने घरों में बंद हो गए। घर के एक दरवाजे पर ताला लगा हुआ था तो दूसरा गेट टूटा और खुला पड़ा था। जिस कमरे में हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वह आज भी वैसे ही पड़ा है। जैसे 27 अक्टूबर 2019 की रात था। सभी सामान बिखरे और कपड़ा उसी तरह रखा है।


