Ahmedabad. उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने विधानसभा में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड गुजरात-2026’ बिधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक किसी धर्म, किसी आस्था या पूजा-पद्धति के विरुद्ध नहीं है। यह महिलाओं को समान अधिकार देने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति में समान अधिकार से भेदभाव खत्म होगा। आदिवासी समुदाय को बाहर रखते हुए उनकी परंपराओं की सुरक्षा का भरोसा दिया। गुजरात यह विधेयक एक देश, एक कानून के दृष्टिकोण को साकार करने जा रहा है। संघवी ने विधेयक पेश होने से पहले संवाददाताओं को भी इस बिल की जानकारी दी।
20 लाख सुझावों में विधेयक के समर्थन में बहुमत
संघवी ने कहा कि विधेयक को लेकर लोगों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। बहुमत विधेयक के समर्थन में है। देश के इतिहास में इतनी संख्या में सुझाव शायद ही किसी विधेयक को मिले होंगे। 49 फीसदी यानी 9.72 लाख सुझाव ईमेल से मिले वहीं 5.5 फीसदी यानी 1.09 लाख वेब पोर्टल से मिले हैं। 81 फीसदी लोगों ने कानून में विवाह के एक समान प्रावधान शामिल करने को समर्थन दिया है। 79 फीसदी ने तलाक के लिए समान कानून पर मुहर लगाई है। 83 फीसदी लोग मानते हैं कि पारिवारिक कानून में महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव तत्काल खत्म होना चाहिए। 86 फीसदी ने विवाह रद्द करने, तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य करने की वकालत की है। सभी समुदायों में तलाक के लिए समान अधिकार की 83 फीसदी लोगों ने बात कही है।


