VIDEO-एमपी के चीते ने राजस्थान में किया बकरी का शिकार:सरसों के खेत में घात लगाए बैठा था, पलक झपकते गर्दन पर गढ़ाए दांत

VIDEO-एमपी के चीते ने राजस्थान में किया बकरी का शिकार:सरसों के खेत में घात लगाए बैठा था, पलक झपकते गर्दन पर गढ़ाए दांत

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान पहुंचे एक चीते ने शुक्रवार को‎ सरसों के खेत से तेज दौड़ लगाते हुए बकरी पर झपट्टा ‎मारकर उसका शिकार कर लिया। इस पूरी घटना का ‎वीडियो सामने आया है। ‎यह वीडियो राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र का है। दरअसल, राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध रामगढ़ क्रेटर एरिया में चीता केपी-2 पिछले चार दिनों से बांझ आमली कंजर्वेशन रिजर्व से रामगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व सहित आसपास के खेतों में घूम रहा है। क्या है वीडियो में रामगढ़ में दिखे इस चीते का एक ताजा वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खेत के पास घूम रही एक बकरी पर अचानक झपटता है। वीडियो में नजर आ रहा है कि कैसे चीता कुछ ही सेकंड में अपनी फुर्ती दिखाते हुए खेत की तरफ दौड़ता है और बकरी को संभलने का मौका भी नहीं देता। पलक झपकते ही बकरी उसकी पकड़ में आ जाती है। इस वजह से पहुंचा राजस्थान चीता केपी-2 की निगरानी में कूनो और स्थानीय वन विभाग की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। चीते के गले में बंधी कॉलर डिवाइस और रडार एंटीना के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। कूनो नेशनल पार्क की टीम के अलावा राजस्थान के वनकर्मी भी 24 घंटे उस पर नजर रख रहे हैं। ग्रामीणों को चीता मूवमेंट वाले इलाकों में न जाने की समझाइश दी जा रही है। वन विभाग के अनुसार चीता के यहां पहुंचने का मुख्य कारण रामगढ़ क्रेटर के पीछे बहने वाली कूल नदी है। यह क्षेत्र बीहड़ों, संकरी पगडंडियों, घाटियों और खुले मैदानों से घिरा है। कूल नदी में पानी की पर्याप्त उपलब्धता है और यहां नीलगाय सहित अन्य शिकार भी आसानी से उपलब्ध हैं, जो चीते के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
शिकार भी कर रहा है चीता
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से प्राकृतिक काॅरिडोर से चीता केपी-2 करीब 90 किमी की दूरी तय करके पहुंचा है। चीता केपी-2 इससे पहले 27 नवंबर को रामगढ़ पहुंच गया था। यहां उसने पांच बार शिकार भी किया, जिसे 13 दिसंबर को ट्रेंकुलाइज करके कूनो की टीम वापस ले गई। करीब दो महीने बाद ही 14 फरवरी को बांझ आमली से होकर चीता केपी-2 फिर से रामगढ़ क्षेत्र में पहुंच गया है। यहां फिर से 16 फरवरी को नीलगाय का शिकार किया है। भारत में ही जन्मा है केपी-2
वन विभाग के अनुसार अफ्रीका से लाए गए चीता ओवान-आशा के तीन शावक हैं। इनमें केपी-1, केपी-2 और केपी-3 हैं। इनमें से केपी-2 की मूवमेंट राजस्थान की ओर से हैं। इसकी उम्र करीब ढाई साल है। चीता जहां जाता है, उसके एक किमी एरिया में ट्रेकिंग की जाती है। साथ ही वह जिस दिशा में जाता है उससे 50 से 100 मीटर दूरी पर रहकर मॉनिटरिंग की जाती है। अग्नि ने की शुरुआत, केपी-2 पहुंचा दूसरी बार
चीता अग्नि केलवाड़ा रेंज से जुड़े जैतपुरा में 25 दिसंबर 2023 को पहुंचा था, जिसे उसी दिन कूनो पार्क की टीम ट्रेंकुलाइज करके वापस ले गई। फरवरी 2024 में चीता वीरा 6 से 10 फरवरी तक चार दिन शाहाबाद कंजर्वेशन रिजर्व में रहकर लौट गई। पिछले साल मार्च में चीता आशा उसके शावकों के साथ राजस्थान बॉर्डर के इलाकों में घूमती रही। पिछले साल ही नंवबर-दिसंबर में चीता केपी-2 रामगढ़ में रहा।
ज्वाला ने भी किया था बकरी का शिकार करीब छह महीने पहले कूनो से मादा चीता ‘ज्वाला’ 130 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर जिले के बालेर गांव पहुंच गई थी। यहां उसने एक बाड़े में बकरी का शिकार कर लिया।
चीता के एग्रेसिव होने कारण वन विभाग की टीम रेस्क्यू नहीं कर पाई। इसके बाद कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों को जानकारी दी गई। कूनो नेशनल पार्क की टीम सुबह करीब 10 बजे बालेर गांव पहुंची और 15 मिनट में ज्वाला को ट्रैंकुलाइज कर कूनो ले गई। सवाई माधोपुर का बालेर गांव मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से सटा हुआ है। चीता प्रोजेक्ट में शामिल हो चुका है राजस्थान, 7 जिले शामिल
मध्य प्रदेश में चल रहे देश के पहले चीता प्रोजेक्ट में राजस्थान को शामिल किया जा चुका है। दोनों स्टेट के बीच 17 हजार वर्ग किलोमीटर का चीता कॉरिडोर बनेगा। इसमें चीता खुले में घूम सकेंगे। इस चीता प्रोजेक्ट में राजस्थान के 7 जिले शामिल होंगे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी एक्शन प्लान के अनुसार भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने कूनो-गांधीसागर लैंडस्केप का निर्धारण किया है। इसमें मध्य प्रदेश का 10,500 वर्ग किमी क्षेत्र और राजस्थान का 6500 वर्ग किमी क्षेत्र आएगा। कॉरिडोर में चीते कूनो नेशनल पार्क से राजस्थान के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से होते हुए गांधी सागर सेंचुरी तक मूव कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि इस कॉरिडोर में उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर का वन्य क्षेत्र में भी शामिल हो सकता है। रामगढ़ है भारत का पहला भू विरासत स्थल
राजस्थान सरकार ने बारां जिले में स्थित लगभग 165 मिलियन वर्ष पुराने रामगढ़ क्रेटर को आधिकारिक तौर पर भारत के पहले भू-विरासत स्थल दे रखी है। इसे एक प्रमुख भू-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह देश में उल्कापिंड के प्रभाव से निर्मित एक अनूठा खगोलीय स्थल है। रामगढ़ में 1440 हैक्टेयर और कुंजी सुवांस में 2368 सहित कुल 3808 हैक्टेयर में कंजर्वेशन रिजर्व घोषित है। रामगढ़ स्थित पुष्कर झील को वेटलैंड घोषित है। रामगढ़ में है मिनी खजुराहो और पहाड़ी पर अन्नपूर्णा कृष्णाइ माता मंदिर है।

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