बिहार विधानसभा में अलीनगर विधायक मैथिली ठाकुर ने एक ध्यानाकर्षण नोटिस के जरिए ‘अर्जुन वृक्षारोपण’ और इसके औषधीय उपयोग की अहमियत पर राज्य सरकार का ध्यान दिलाया है। उन्होंने सदन में एक प्लान पेश किया जिससे न सिर्फ बिहार में हरियाली बढ़ेगी बल्कि राज्य के रेवेन्यू और रोजगार में भी बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने इसे “ट्रिपल बेनिफिट” फॉर्मूला बताया, जिसमें हेल्थ सिक्योरिटी, युवाओं को रोजगार और पर्यावरण सुरक्षा शामिल है। उनका दावा है कि अगर इस प्रस्ताव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाता है, तो बिहार हर्बल दवा के क्षेत्र में एक लीडिंग राज्य बन सकता है।
सदन को संबोधित करते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि अर्जुन का पेड़ उत्तर बिहार में, खासकर अलीनगर विधानसभा क्षेत्र में बहुत ज्यादा मिलता है। यह सिर्फ एक पेड़ नहीं है, बल्कि एक बड़ी आर्थिक और आयुर्वेदिक संपत्ति है जिसका अभी तक सही इस्तेमाल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर इसकी छाल को दूसरे राज्यों में कच्चे माल के तौर पर भेजने के बजाय यहीं प्रोसेस किया जाए, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे सकती है।
अर्जुन वृक्ष क्यों खास?
विधायक ने सदन में विस्तार से बताया कि अर्जुन वृक्ष की छाल में बीटा-सिटोस्टेरॉल, अर्जुंनिक अम्ल और फ्रिडेलीन जैसे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। आयुर्वेद में अर्जुन घृत, अर्जुनारिष्ट, चूर्ण और काढ़ा जैसी दवाएं हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और क्षय रोग में उपयोगी मानी जाती हैं। कई शोधकर्ताओं ने भी इसके लाभकारी प्रभावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब हार्ट डिजीज और डायबिटीज जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब सस्ती और प्रभावी हर्बल दवाओं की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में बिहार इस क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
‘मेक इन बिहार’ के तहत हर्बल हब की मांग
मैथिली ठाकुर ने सुझाव दिया कि जिला स्तर पर छोटे-छोटे प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएं, जहां अर्जुन छाल से टैबलेट, चूर्ण, काढ़ा और हार्ट केयर सप्लीमेंट तैयार किए जाएं। इन उत्पादों की ब्रांडिंग कर सरकार के पोर्टल के माध्यम से ‘मेक इन बिहार’ के तहत बाजार में उतारा जा सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि योजना के तहत कच्चे माल का एकत्रीकरण, किसानों का रजिस्ट्रेशन, सरकारी सहायता और प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना सुनिश्चित की जाए। इससे स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन होगा और राज्य को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
ट्रिपल बेनिफिट मॉडल क्या है?
मैथिली ठाकुर ने अपने प्रस्ताव को ‘ट्रिपल बेनिफिट’ मॉडल बताया। उनके अनुसार अर्जुन वृक्षारोपण से तीन मुख्य फायदे होंगे।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: अर्जुन आधारित दवाओं से लोगों को सस्ती और प्रभावी इलाज की सुविधा मिलेगी।
- युवाओं को रोजगार: प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग, मार्केटिंग और खेती से हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
- पर्यावरण संरक्षण: अर्जुन वृक्ष पर्यावरण के लिए लाभकारी है और मिट्टी कटाव रोकने में सहायक है।
मैथिली ठाकुर ने खास तौर पर मिथिला क्षेत्र का जिक्र किया, जहां हर साल बाढ़ और मिट्टी कटाव की समस्या गंभीर रहती है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर अर्जुन वृक्षारोपण से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत का सुझाव
विधायक ने सरकार से अपील की कि इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाए। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस प्रस्ताव पर ठोस पहल करेगी।
मैथिली ठाकुर ने सोशल मीडिया पर भी इस प्रस्ताव को साझा करते हुए लिखा कि बिहार को हर्बल उद्योग में अग्रणी राज्य और एक मजबूत ‘हर्बल हब’ बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम हो सकता है। उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने के लिए सरकार का आभार भी जताया।


