मोहाली के जिला व सत्र न्यायालय ने गांव कलोली में लोहे की रॉड से हुए जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपियों को सबूत न होने के कारण पूरी तरह बरी कर दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित लवप्रीत सिंह और उसकी माँ शारदा देवी ने अदालत में अपने पुराने बयान से पलटते हुए साफ कहा कि हम इन लोगों को नहीं पहचानते है। इसके बाद अदालत ने गुरप्रीत सिंह उर्फ टिंडा (27 साल), अनुराग उर्फ वंशू (21 साल) और उनकी माँ परमजीत कौर उर्फ पम्मी (55 साल) तीनों निवासी गांव कलोली, थाना बनूर, मोहाली को बरी कर दिया ह। सभी गवाह अदालत में मुकरे
कोर्ट में गवाही देते समय पीड़ित लवप्रीत सिंह ने कहा कि हमला करने वाले 2-3 अज्ञात लोग थे। उनके चेहरे कपड़े से ढके हुए थे। मैं इन आरोपियों को कभी नहीं देखा। आज पहली बार कोर्ट में देख रहा हूँ। पीड़ित की माँ शारदा देवी और मौके पर मदद करने आए पंचायत सदस्य बलबीर सिंह ने भी यही कहा कि हमें आरोपियों की कोई पहचान नहीं है। रॉड पर नही मिले कोई निशान
पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों के पास से लोहे की रॉड बरामद हुई थी। लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया क्योंकि रॉड पर न तो खून के निशान थे और न ही कोई उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) मिले थे। पुलिस की कहानी पर नही दी जा सकती सजा
सत्र न्यायाधीश ने फैसले में लिखा कि जब पीड़ित और उसके परिवार वाले खुद आरोपियों को नहीं पहचान रहे हैं, तो सिर्फ पुलिस की कहानी पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए पहले पुलिस को यह दिए थे वयान
पुलिस के मुताबिक, यह घटना 12 अप्रैल 2025 की सुबह की है। लवप्रीत सिंह सुबह टहलकर घर लौट रहा था। गांव कलोली के श्मशान घाट के पास तीन लोगों ने उसे घेर लिया और लोहे की रॉड से बुरी तरह मारपीट कर दी। लवप्रीत को गंभीर चोटें आईं। हमले की वजह बताई गई पंचायती तालाब की जमीन पर कब्जे का विवाद। लवप्रीत का परिवार इस जमीन पर कब्जा होने का विरोध कर रहा था।


