जालौन में वर्ष 2020 के बहुचर्चित हत्या व छेड़छाड़ के मामले में उरई के न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। सोमवार को एससी-एसटी कोर्ट उरई के न्यायाधीश ने ने दीपांशु, अंशु उर्फ अनुरुद्ध और अभिनेन्द्र सिंह उर्फ बोली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही प्रत्येक पर 1,04,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। मामला थाना नदीगांव क्षेत्र के ग्राम सिकरी बुजुर्ग का है। इस मामले की पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ता लखनलाल निरंजन और बृजराज राजपूत ने संयुक्त रूप से बताया कि वादी द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, अभियुक्तों ने उसकी पुत्रवधु के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की, छेड़छाड़ की और जान से मारने की धमकी दी थी। इसी विवाद के दौरान वादी के पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस गंभीर घटना के आधार पर 5 जुलाई 2020 को थाना नदीगांव में मु0अ0सं0 68/20 के तहत धारा 302, 34, 354, 504, 506 भादवि व 3(2)(5) एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचक ने मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए साक्ष्य संकलित किए और गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके बाद 28 अगस्त 2020 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। करीब छह वर्षों तक चले इस मामले में जालौन पुलिस, अभियोजन पक्ष और कोर्ट पैरोकार द्वारा लगातार प्रभावी पैरवी की गई। अंततः 30 मार्च 2026 को न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई।


