बलिया न्यायालय ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास और 13-13 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन शाखा की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आया है। यह मामला थाना नरही में वर्ष 2004 में धारा 323, 325, 308, 336, 452, 504, 506 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया था। अभियुक्तों की पहचान मुन्नीलाल पासवान पुत्र लखराज पासवान और देवराज पासवान पुत्र लखराज पासवान, निवासीगण ग्राम लक्ष्मणपुर, थाना नरही, जनपद बलिया के रूप में हुई है। विशेष न्यायाधीश (एस.सी.एस.टी. एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश, बलिया ने अभियुक्तों को धारा 452 भादवि के तहत दोषी पाया। उन्हें चार-चार वर्ष के कारावास और प्रत्येक को सात-सात हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड का भुगतान न करने पर अभियुक्तों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसी प्रकार, धारा 325 भादवि में दोषी पाए जाने पर अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 323 भादवि के तहत दोषसिद्ध होने पर अभियुक्तों को छह-छह माह के कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड का भुगतान न करने की स्थिति में उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में अभियोजन अधिकारी ए.डी.जी.सी. विष्णुदत्त पाण्डेय रहे, जिनकी प्रभावी पैरवी और बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल के प्रयासों से यह फैसला संभव हो पाया।


