दुर्ग जिले के खुर्सीपार क्षेत्र में हुए हत्या की कोशिश के एक मामले में सत्र न्यायालय ने 6 साल बाद फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की कोर्ट ने 2 आरोपी लक्ष्मीनारायण उर्फ राजेन्द्र सिंह और इंदर सिंह उर्फ टकली को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। यह घटना 26 जुलाई 2020 की रात करीब 9:30 बजे खुर्सीपार स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर के पास हुई थी। एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब आरोपियों ने पीड़ित जितेंद्र सिंह के साथ गाली-गलौज की। अचानक चाकू निकालकर किया हमला जब जितेंद्र सिंह अपने दोस्तों चिन्नी कृष्णा और रमजान अली के साथ आरोपियों से बात करने पहुंचे, तो विवाद बढ़ गया। आरोपियों ने अचानक चाकू निकालकर हमला कर दिया। लक्ष्मीनारायण ने चिन्नी कृष्णा के हाथ पर वार किया, जबकि इंदर सिंह ने रमजान अली के पेट और पसलियों पर गंभीर हमला किया। हमले में लगी चोटें इतनी गंभीर थीं कि यदि समय पर इलाज न मिलता तो दोनों पीड़ितों की जान जा सकती थी। घटना के तुरंत बाद खुर्सीपार पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से हमले में प्रयुक्त चाकू बरामद किए। घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया और गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जो अदालत में ठोस साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। जान से मारने की थी मंशा अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों की मंशा जान से मारने की थी। रमजान अली के पेट और पसलियों पर चाकू से हमला करना स्पष्ट रूप से हत्या के प्रयास की श्रेणी में आता है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 (हत्या का प्रयास) और 326/34 (गंभीर चोट) के तहत दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने अपने फैसले में यह भी कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में नरमी न्याय व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकती है। 7 साल की कठोर कैद, जुर्माना भी अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के प्रयास के लिए 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध में 5-5 वर्ष की अतिरिक्त सजा दी गई। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों को केंद्रीय जेल दुर्ग भेजा जाए। न्यायालय की टिप्पणी: अपराध पर सख्ती जरूरी सजा तय करते समय अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कम सजा देना समाज में कानून के प्रति विश्वास को कमजोर करता है। अपराध की गंभीरता और पीड़ितों को लगी चोटों को देखते हुए कठोर दंड आवश्यक है।


