Venezuela Crisis: वेनेजुएला में तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर असर, निवेशकों की उड़ेगी नींद

Venezuela Crisis: वेनेजुएला में तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर असर, निवेशकों की उड़ेगी नींद

Venezuela Oil Crisis 2026 : अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आए एक बड़े भूचाल से ग्लोबल ऑइल मार्केट और भारतीय शेयर बाजार की धड़कनें बढ़ गई हैं। वेनेजुएला (Venezuela Oil Production 2026) में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के माध्यम से हुए सत्ता परिवर्तन से कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इसका सीधा असर भारतीय सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन तेल की कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

शेयर बाजार का हाल: कभी तेजी, कभी गिरावट

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही वेनेजुएला संकट का असर दिखने लगा। शुरुआती कारोबार में इंडियन ऑइल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के शेयरों में 2.2% तक का उछाल देखा गया। हालांकि, यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिकी। मंगलवार आते-आते बाजार में डर का माहौल बना और इन कंपनियों के शेयरों में 3% से 5% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति सुचारू रहेगी या सप्लाई चेन बाधित होगी।

वेनेजुएला संकट: क्यों है यह पूरी दुनिया के लिए अहम ?

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार (Oil Reserves) है। लेकिन विडंबना यह है कि तकनीक की कमी, राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार के कारण वह इस खजाने का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाया है। साल 2015 में जहां वेनेजुएला 30 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन करता था, वहीं प्रतिबंधों के कारण यह घट कर 10 लाख बैरल से भी कम रह गया है। अब अमेरिका समर्थक सरकार बनने से उम्मीद है कि प्रतिबंध हटेंगे और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल युद्ध जैसी स्थिति ने कीमतों में उछाल की आशंका पैदा कर दी है।

दुनिया भर में तेल भंडार। (फोटो: वॉशिंगटन पोस्ट, डिजाइन: पत्रिका)

दुनिया भर में तेल भंडार। (फोटो: वॉशिंगटन पोस्ट, डिजाइन: पत्रिका)

पीएल कैपिटल की रिपोर्ट: कुप्रबंधन और पंगु होता तंत्र

पीएल कैपिटल (PL Capital) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला का तेल क्षेत्र विशेषज्ञता की कमी और निवेश के अभाव में पंगु हो चुका है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि केवल सत्ता परिवर्तन से रातों-रात उत्पादन नहीं बढ़ेगा। इसके लिए भारी निवेश और नई तकनीक की जरूरत होगी। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी, जिसका भारत जैसे तेल आयातक देशों को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

‘सप्लाई शॉक’ का खतरा बना हुआ

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली तेल की कीमतों को लंबी अवधि में नीचे ला सकती है, लेकिन तत्काल प्रभाव से ‘सप्लाई शॉक’ का खतरा बना हुआ है। घरेलू निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे ओएमसी (OMC) शेयरों में भारी निवेश से पहले वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखें। आम जनता के बीच भी यह डर है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा हुआ, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर से इजाफा हो सकता है।

तेल की वैश्विक कीमतों में आ सकती है गिरावट

आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई वेनेजुएलाई सरकार तेल उत्पादन को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाती है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रतिबंधों को आधिकारिक रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू होते ही तेल की वैश्विक कीमतों में गिरावट आ सकती है। भारतीय विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि वैकल्पिक स्रोतों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

चीन के हितों को पहुंच सकती है चोट

बहरहाल,इस पूरे घटनाक्रम का एक और पहलू ‘चीन’ है। वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में चीन का भारी निवेश रहा है। अब वहां अमेरिका समर्थक सरकार बनने से चीन के हितों को चोट पहुंच सकती है। यह संकट अब केवल तेल का नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के बीच एक नए कूटनीतिक युद्ध का मैदान भी बन सकता है।

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