भास्कर न्यूज| सीतामढ़ी ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मनरेगा की जगह अब विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन–ग्रामीण अधिनियम–2025 (भीबी-जी-राम-जी) लागू किया जाएगा। इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। इसे लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित उप विकास आयुक्त कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डीडीसी संदीप कुमार ने अधिनियम की विशेषताओं, उद्देश्यों और क्रियान्वयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम विकसित भारत–2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। इस दौरान एनईपी निदेशक शशिकांत शर्मा, डीपीओ मनरेगा गौतम कुमार विख्यात, डीएफएम राज कुमार सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। डीडीसी ने कहा कि नए कानून के तहत रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। अधिनियम की एक विशेष व्यवस्था के तहत कृषि कार्यों और ग्रामीण श्रम के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित की गई है। यह विराम बुआई एवं कटाई के मौसम में लागू रहेगा, ताकि किसानों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े। हालांकि, श्रमिकों को 125 दिनों का रोजगार वर्ष की शेष अवधि में पूरा कराया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, जीपीएस आधारित निगरानी, रियल-टाइम डैशबोर्ड और एआई आधारित ऑडिट जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। डीडीसी ने बताया कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा कार्य समाप्ति के अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। तय समय में रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर लाभार्थियों को बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों को पीएम गति शक्ति पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसमें चार प्रमुख क्षेत्रों जल संचयन, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका सृजन तथा जलवायु जनित आपदा न्यूनीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी। भास्कर न्यूज| सीतामढ़ी ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मनरेगा की जगह अब विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन–ग्रामीण अधिनियम–2025 (भीबी-जी-राम-जी) लागू किया जाएगा। इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। इसे लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित उप विकास आयुक्त कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डीडीसी संदीप कुमार ने अधिनियम की विशेषताओं, उद्देश्यों और क्रियान्वयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम विकसित भारत–2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। इस दौरान एनईपी निदेशक शशिकांत शर्मा, डीपीओ मनरेगा गौतम कुमार विख्यात, डीएफएम राज कुमार सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। डीडीसी ने कहा कि नए कानून के तहत रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। अधिनियम की एक विशेष व्यवस्था के तहत कृषि कार्यों और ग्रामीण श्रम के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित की गई है। यह विराम बुआई एवं कटाई के मौसम में लागू रहेगा, ताकि किसानों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े। हालांकि, श्रमिकों को 125 दिनों का रोजगार वर्ष की शेष अवधि में पूरा कराया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, जीपीएस आधारित निगरानी, रियल-टाइम डैशबोर्ड और एआई आधारित ऑडिट जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। डीडीसी ने बताया कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा कार्य समाप्ति के अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। तय समय में रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर लाभार्थियों को बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों को पीएम गति शक्ति पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसमें चार प्रमुख क्षेत्रों जल संचयन, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका सृजन तथा जलवायु जनित आपदा न्यूनीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।


