प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद के दोनों सदनों से ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ पारित हो गया है। इसे ग्रामीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है। इस अधिनियम से विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विकसित गांवों की नई रूपरेखा तैयार होगी। इसी अधिनियम के संबंध में शुक्रवार शाम मुंगेर विधायक प्रणय कुमार के नेतृत्व में एनडीए की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल, विधान पार्षद लाल मोहन गुप्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पोद्दार सहित कई अन्य नेता उपस्थित थे। ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम फैलाने की कोशिश प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल ने कहा कि विपक्षी दल इस ऐतिहासिक अधिनियम को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि जनता तक इस कानून के सही उद्देश्य और लाभ पहुंचाना सभी का दायित्व है। मंडल ने आगे बताया कि यह अधिनियम मजदूरों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने की ठोस गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि इस योजना को अधिक जनोपयोगी बनाया गया है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता आएगी और विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी। मनरेगा की तर्ज पर रोजगार की गारंटी मुंगेर विधायक कुमार प्रणय ने अधिनियम के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनरेगा की तर्ज पर रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी में देरी होने पर अतिरिक्त भुगतान का भी प्रावधान किया गया है। कुमार प्रणय ने यह भी स्पष्ट किया कि अब योजनाएं केंद्र से थोपी नहीं जाएंगी, बल्कि ग्राम सभा और ग्राम पंचायतें स्वयं तय करेंगी कि गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य होने चाहिए। महिलाओं के लिए खुलेगा स्किल सेंटर इस अधिनियम के तहत कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा कराए जाएंगे। योजनाएं जल संरक्षण, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका से जुड़े कार्य और आपदा प्रबंधन जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों में लागू होंगी। इसमें तालाब, चेकडैम, स्कूल, अस्पताल, सड़क, नाली, शेड निर्माण के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए स्किल सेंटर और हाट जैसे कार्य भी शामिल हैं। खेती को ध्यान में रखते हुए बुवाई और कटाई के समय योजना के कार्यों को अधिकतम 60 दिनों तक स्थगित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हो। साथ ही योजना से जुड़े कर्मियों के प्रशिक्षण और मानदेय के लिए प्रशासनिक खर्च बढ़ाया गया है। वहीं इसको लेकर विधान पार्षद लालमोहन गुप्ता ने कहा कि हर कार्य का सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा और बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीआईएस और मोबाइल ऐप के जरिए निगरानी की जाएगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल होगी। मजदूर वर्ग के हितों को करेगी मजबूत भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अरूण कुमार पोद्दार ने कहा कि सरकार इसके माध्यम से मजदूर वर्ग के हितों को और मजबूत करेगी। हर पंचायत, हर जिला प्रखंड और जिला स्तर पर लोगों को इससे जुड़ी अहम जानकारी से अवगत करवाने का लक्ष्य रखा गया है। लोगों को इस योजना के तहत अधिक से अधिक लाभ मिलेगा और पूरी योजना पारदर्शी ओर स्पष्ट नजर आएगी। एनडीए नेताओं ने कहा कि यह अधिनियम गांवों में पारदर्शिता, रोजगार और समृद्धि की मजबूत नींव रखेगा। इस मौके पर संतोष पोद्दार, विमलेंदु राय, मणिशंकर भोलू सहित अन्य मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद के दोनों सदनों से ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ पारित हो गया है। इसे ग्रामीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है। इस अधिनियम से विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विकसित गांवों की नई रूपरेखा तैयार होगी। इसी अधिनियम के संबंध में शुक्रवार शाम मुंगेर विधायक प्रणय कुमार के नेतृत्व में एनडीए की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल, विधान पार्षद लाल मोहन गुप्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पोद्दार सहित कई अन्य नेता उपस्थित थे। ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम फैलाने की कोशिश प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल ने कहा कि विपक्षी दल इस ऐतिहासिक अधिनियम को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि जनता तक इस कानून के सही उद्देश्य और लाभ पहुंचाना सभी का दायित्व है। मंडल ने आगे बताया कि यह अधिनियम मजदूरों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने की ठोस गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि इस योजना को अधिक जनोपयोगी बनाया गया है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता आएगी और विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी। मनरेगा की तर्ज पर रोजगार की गारंटी मुंगेर विधायक कुमार प्रणय ने अधिनियम के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनरेगा की तर्ज पर रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी में देरी होने पर अतिरिक्त भुगतान का भी प्रावधान किया गया है। कुमार प्रणय ने यह भी स्पष्ट किया कि अब योजनाएं केंद्र से थोपी नहीं जाएंगी, बल्कि ग्राम सभा और ग्राम पंचायतें स्वयं तय करेंगी कि गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य होने चाहिए। महिलाओं के लिए खुलेगा स्किल सेंटर इस अधिनियम के तहत कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा कराए जाएंगे। योजनाएं जल संरक्षण, अधोसंरचना निर्माण, आजीविका से जुड़े कार्य और आपदा प्रबंधन जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों में लागू होंगी। इसमें तालाब, चेकडैम, स्कूल, अस्पताल, सड़क, नाली, शेड निर्माण के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए स्किल सेंटर और हाट जैसे कार्य भी शामिल हैं। खेती को ध्यान में रखते हुए बुवाई और कटाई के समय योजना के कार्यों को अधिकतम 60 दिनों तक स्थगित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हो। साथ ही योजना से जुड़े कर्मियों के प्रशिक्षण और मानदेय के लिए प्रशासनिक खर्च बढ़ाया गया है। वहीं इसको लेकर विधान पार्षद लालमोहन गुप्ता ने कहा कि हर कार्य का सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा और बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीआईएस और मोबाइल ऐप के जरिए निगरानी की जाएगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल होगी। मजदूर वर्ग के हितों को करेगी मजबूत भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अरूण कुमार पोद्दार ने कहा कि सरकार इसके माध्यम से मजदूर वर्ग के हितों को और मजबूत करेगी। हर पंचायत, हर जिला प्रखंड और जिला स्तर पर लोगों को इससे जुड़ी अहम जानकारी से अवगत करवाने का लक्ष्य रखा गया है। लोगों को इस योजना के तहत अधिक से अधिक लाभ मिलेगा और पूरी योजना पारदर्शी ओर स्पष्ट नजर आएगी। एनडीए नेताओं ने कहा कि यह अधिनियम गांवों में पारदर्शिता, रोजगार और समृद्धि की मजबूत नींव रखेगा। इस मौके पर संतोष पोद्दार, विमलेंदु राय, मणिशंकर भोलू सहित अन्य मौजूद थे।


