टॉप-10 कंपनियों में से 6 की वैल्यू 64,734 करोड़ घटी:एयरटेल टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹30 हजार करोड़ घटी; ICICI बैंक का मार्केट कैप भी घटा

टॉप-10 कंपनियों में से 6 की वैल्यू 64,734 करोड़ घटी:एयरटेल टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹30 हजार करोड़ घटी; ICICI बैंक का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 6 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 64,734.46 करोड़ रुपए घट गई। मिडिल ईस्ट में तनाव और इजराइल-ईरान जंग की वजह से यह गिरावट आई है। इस दौरान भारती एयरटेल की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। भारती एयरटेल का मार्केट कैप 29,993.07 करोड़ रुपए घटकर ₹10.20 लाख करोड़ पर आ गया। ICICI बैंक की मार्केट वैल्यू ₹12,845.81 करोड़ घटकर ₹8.70 लाख करोड़ पर आ गई। बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 11,169.36 करोड़ रुपए घटकर ₹5.14 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू ₹7,822.79 करोड़ घटकर ₹11.56 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मार्केट कैप भी घटा। वहीं TCS, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। बीते हफ्ते सेंसेक्स 264 अंक गिरा था अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच पिछले हफ्ते सेंसेक्स 264 और निफ्टी 106 अंक गिरा था। वहीं शेयर बाजार में 2 अप्रैल यानी गुरुवार को गिरावट रही थी। वहीं शुक्रवार को गुड फ्राइडे की छुट्टी के चलते बाजार बंद था। सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 1,773 अंक चढ़कर बंद हुआ था। सुबह ये भारी दबाव के साथ खुला और गिरकर 71,545 के स्तर तक आ गया था। बाद में बाजार में खरीदारी आई और यह 185 अंक (0.25%) चढ़कर 73,320 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 22,182 का निचला स्तर बनाने के बाद 531 अंकों की रिकवरी दिखी। ये 34 अंक (0.15%) चढ़कर 22,713 के स्तर पर बंद हुआ। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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