उत्तराखंड जनगणना डायरेक्टर बोलीं- खाली घरों की भी होगी गिनती:पहली बार पेपरलेस तैयार होगा डाटा; प्रवासियों के लिए भी बताए नियम

उत्तराखंड जनगणना डायरेक्टर बोलीं- खाली घरों की भी होगी गिनती:पहली बार पेपरलेस तैयार होगा डाटा; प्रवासियों के लिए भी बताए नियम

उत्तराखंड में जनगणना 2027 की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। खास बात यह है कि राज्य के 1000 से अधिक घोस्ट विलेज (गैर-आबाद गांव) और खाली पड़े घरों की भी गिनती की जाएगी। जिससे पलायन की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकड़ा सामने आ सके। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री समेत ऐसे 131 गांव, जो सर्दियों में बर्फबारी के कारण कट जाते हैं, वहां जनसंख्या गणना फरवरी 2027 से पहले ही सितंबर 2026 में पूरी कर ली जाएगी। प्रवासियों की गणना को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। जनगणना के दौरान 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच जो व्यक्ति जहां रह रहा होगा, उसकी गणना उसी स्थान पर की जाएगी। उत्तराखंड की जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में बताया कि यह पूरी प्रक्रिया तकनीक, सुरक्षा और सटीकता के लिहाज से अब तक की सबसे उन्नत और पारदर्शी जनगणना होगी। अब सवाल-जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: उत्तराखंड में जनगणना कब और कैसे शुरू होगी? जवाब: जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण ‘मकान सूचीकरण’ अप्रैल–मई में होगा, जिसमें हर घर और ढांचे की जानकारी दर्ज की जाएगी। दूसरा और मुख्य चरण ‘जनसंख्या गणना’ 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होगा। लेकिन उत्तराखंड के ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और 131 गांवों में यह काम सितंबर 2026 में ही पूरा कर लिया जाएगा। सवाल: इस बार जनगणना में क्या सबसे बड़ा बदलाव होगा? जवाब: इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पेपरलेस होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे। यह ऐप ऑफलाइन भी काम करेगा, इसलिए नेटवर्क न होने पर भी जानकारी सुरक्षित रहेगी और नेटवर्क मिलते ही सर्वर पर सिंक हो जाएगी। इससे प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी। सवाल: पूरे राज्य को किस तरह से कवर किया जाएगा? जवाब: हमने पूरे उत्तराखंड को करीब 30,000 ब्लॉक्स में विभाजित किया है। एक ब्लॉक में अधिकतम 800 लोग या 150–200 घर होंगे। हर ब्लॉक के लिए एक प्रशिक्षित प्रगणक नियुक्त किया जाएगा, जो स्थानीय शिक्षक या फील्ड कर्मचारी होगा। इससे हर घर तक पहुंच सुनिश्चित होगी। सवाल: मकान सूचीकरण चरण में क्या जानकारी जुटाई जाएगी? जवाब: इस चरण में करीब 34 अहम सवाल पूछे जाएंगे, जैसे घर की बनावट, पानी और बिजली की सुविधा, खाना बनाने का ईंधन, घर में उपलब्ध सुविधाएं, वाहन, टीवी, स्मार्टफोन और परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति। प्रगणक पहले गूगल मैप के जरिए अपने क्षेत्र का नक्शा तैयार करेंगे, फिर हर घर तक पहुंचेंगे। सवाल: जनसंख्या गणना चरण में किस तरह का डेटा लिया जाएगा? जवाब: दूसरे चरण में व्यक्ति-आधारित जानकारी ली जाएगी। इसमें शिक्षा, रोजगार, पलायन, जन्म स्थान, भाषा, धर्म, जाति और परिवार की संरचना जैसी जानकारी शामिल होगी। उत्तराखंड के लिए पलायन से जुड़ा डेटा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। सवाल: बर्फीले इलाकों में दोहरी गणना से कैसे बचेंगे? जवाब: इसके लिए प्रगणकों और सुपरवाइजरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति की गणना पहले ही सितंबर में हो चुकी होगी, तो फरवरी में उसकी दोबारा गणना नहीं की जाएगी। इससे डबल काउंटिंग की संभावना खत्म हो जाएगी। सवाल: डेटा की सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम किए गए हैं? जवाब: डेटा पूरी तरह ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ होगा। साइबर अटैक या डेटा लीक की कोई संभावना नहीं है। सरकार ने सुरक्षा के सभी मानकों को सुनिश्चित करने के बाद ही इस प्रक्रिया को लागू किया है। सवाल: निगरानी और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी? जवाब: इसके लिए सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) पोर्टल विकसित किया गया है। हर प्रगणक की यूनिक आईडी होगी और छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर रहेगा। जब तक सुपरवाइजर डेटा सत्यापित नहीं करेगा, वह फाइनल नहीं माना जाएगा। पोर्टल पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग भी होगी। सवाल: उत्तराखंड के घोस्ट विलेज और प्रवासियों की गणना कैसे होगी? जवाब: राज्य के 1000 से अधिक गैर-आबाद गांवों का भी भौतिक सत्यापन होगा। अगर कोई वापस आ गया होगा तो उसकी गणना होगी, अन्यथा गांव को गैर-आबाद के रूप में दर्ज किया जाएगा। प्रवासियों की गणना उस स्थान पर होगी, जहां वे 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच रह रहे होंगे। सवाल: क्या आम नागरिक खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं? जवाब: हां, इसके लिए एक सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। नागरिक खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं और एक रेफरेंस आईडी प्राप्त करेंगे। प्रगणक उस आईडी के जरिए मौके पर सत्यापन करेगा। 2011 से पूरी तरह बदली प्रक्रिया इस बार की जनगणना 2011 के मुकाबले पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। मोबाइल ऐप, डिजिटल मैपिंग, रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और एन्क्रिप्शन जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। इससे न केवल डेटा तेजी से जुटेगा, बल्कि उसकी सटीकता और विश्वसनीयता भी पहले से ज्यादा होगी। जनगणना को सफल बनाने के लिए राज्य में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लोगों को स्व-गणना पोर्टल, डिजिटल प्रक्रिया और जनगणना के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि अधिकतम लोग इस प्रक्रिया में सहयोग कर सकें। हर ढांचे का बनेगा डिजिटल नक्शा मकान सूचीकरण के दौरान प्रगणक अपने क्षेत्र का डिजिटल लेआउट तैयार करेंगे। इसमें केवल घर ही नहीं, बल्कि दुकान, धार्मिक स्थल, सरकारी भवन और अन्य स्थायी ढांचों को भी मैप किया जाएगा। इससे राज्य के भौतिक ढांचे का व्यापक और प्रमाणिक डेटाबेस तैयार होगा। जनगणना प्रक्रिया में हर स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रगणकों द्वारा भरी गई जानकारी का सत्यापन सुपरवाइजर करेंगे। इससे डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और गलत या फर्जी जानकारी दर्ज होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। ———————— ये खबर भी पढ़ें : चारधाम यात्रा- अतिथि देवो भव: की तर्ज पर होगा स्वागत: देहरादून में 50 रजिस्ट्रेशन काउंटर 24 घंटे खुलेंगे; ऑफलाइन के भी पुख्ता प्रबंध देहरादून जिला प्रशासन ने चारधाम यात्रा-2026 के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत को ‘अतिथि देवो भव:’ की तर्ज पर सुनिश्चित करने के लिए ऋषिकेश में 30 और विकासनगर में 20 रजिस्ट्रेशन काउंटर 24 घंटे संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन और मोबाइल टीमों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। (पढ़ें पूरी खबर)

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