राजधानी के विश्वेश्वरैया सभागार में बुधवार को ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और कला का रंगीन संगम देखने को मिला। ‘लखनऊ ओडिशा समाज’ की ओर से आयोजित उत्कल दिवस समारोह इस बार खास रहा। कार्यक्रम को महान ओडिसी नृत्य गुरु केलुचरण महापात्र के जन्म शताब्दी वर्ष को समर्पित किया गया, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया। समारोह की मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखिका और शिक्षाविद् डॉ. सरोजिनी साहू रहीं। साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ‘लखनऊ ओड़िया साहित्य सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने समाज में महिलाओं के सामने मौजूद ‘ग्लास सीलिंग’ को तोड़ने और पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने में साहित्य की अहम भूमिका पर जोर दिया। सम्मान-पत्र का वाचन समाज के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सुकांत चौधरी ने किया। वर्षभर की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष गोपबंधु पटनायक के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सचिव प्रोफेसर डी.आर. साहू ने वर्षभर की गतिविधियों और उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान समाज की वार्षिक स्मारिका ‘निर्मल्य’ का विमोचन भी किया गया। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त आईपीएस) एस.एन. सबत ने ओड़िया संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज के प्रयासों की सराहना की। ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं शाम होते ही सांस्कृतिक संध्या ने माहौल को जीवंत कर दिया। आईसीसीआर से मान्यता प्राप्त कलाकार डॉ. मनोरंजन प्रधान और मिनति प्रधान की मंडली ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लयबद्ध मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा और ओडिशा की सांस्कृतिक सुगंध लखनऊ में महसूस की गई। ओड़िया फूड फेस्टिवल का आयोजन किया कार्यक्रम के अंत में ओड़िया फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जहां पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ गया।यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि लखनऊ में रह रहे ओड़िया समुदाय की एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और विरासत के गर्व का सशक्त प्रदर्शन बनकर उभरा।


