घर बैठे बिना परीक्षा दिए विश्वविद्यालयों की ढाई लाख में बेचते थे सर्टिफिकेट…, फर्जी डिग्री माफिया का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड सहित पांच गिरफ्तार

घर बैठे बिना परीक्षा दिए विश्वविद्यालयों की ढाई लाख में बेचते थे सर्टिफिकेट…, फर्जी डिग्री माफिया का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड सहित पांच गिरफ्तार

UP University Certificate Fraud Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में एक बड़ा फर्जी डिग्री रैकेट पकड़ा गया है, जहां घर बैठे बिना परीक्षा दिए यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट लाखों रुपए में बेचे जा रहे थे। पुलिस की कार्रवाई में इस गिरोह का मास्टरमाइंड समेत पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह गैंग हाईस्कूल और इंटर की फर्जी मार्कशीट से लेकर ग्रेजुएशन, बीटेक, एलएलबी और यहां तक कि बीफार्मा-डीफार्मा तक की डिग्रियां तय रेट पर बेच रहा था। कुछ मामलों में तो विश्वविद्यालय कर्मचारियों की मदद से ये सर्टिफिकेट ऑनलाइन तक अपलोड कर दिए जाते थे, जिससे दस्तावेज बिल्कुल असली जैसे नजर आते थे। इस खुलासे ने शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देशन में किदवई नगर थाने ने छापेमारी कर मास्टरमाइंड गिरधारी उर्फ गिरीश, सरगना शैलेंद्र कुमार, नागेंद्र मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्विनी निगम समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पांच आरोपी अभी भी फरार

इस मामले में पांच आरोपी अभी भी फरार हैं। गिरोह ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। पुलिस ने 900 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां-मार्कशीट, 80 फर्जी प्रपत्र, डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली सील, दो कारें और करोड़ों की संपत्ति जब्त की। गिरोह सोशल मीडिया से ग्राहक तलाशता था, डेटा कलेक्ट करता और हूबहू असली जैसी डिजाइनिंग कर जाली हस्ताक्षर-सील लगाता था। फर्जी डिग्री देने के लिए गिरोह के लोग हाईस्कूल/इंटर 50 हजार, ग्रेजुएशन 75 हजार, बीटेक/एलएलबी 1.50 लाख, बीफार्मा/डीफार्मा 2.50 लाख रुपए वसूलते थे। कुछ विश्वविद्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से ऑनलाइन अपलोड भी कर देते थे।

श्री कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर के रजिस्ट्रार ने कहा कि कोई एजेंट नहीं है, अब सभी डिग्रियां डिजिलॉकर पर उपलब्ध हैं। पुलिस ने एसआईटी गठित कर जांच तेज की है, जिसमें फर्जी एलएलबी से वकालत करने वाले 10 वकीलों की भी पड़ताल हो रही है।

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