एक्टिंग करने पर पड़ती थी मार, अमिताभ बच्चन की नकल से जीता दिल, पारितोष त्रिपाठी ऐसे बने ‘टीआरपी मामा’

एक्टिंग करने पर पड़ती थी मार, अमिताभ बच्चन की नकल से जीता दिल, पारितोष त्रिपाठी ऐसे बने ‘टीआरपी मामा’

Paritosh Tripathi Birthday Special: टीवी की दुनिया में जब भी हाजिरजवाबी, सादगी और दिल से जुड़ने वाले कलाकारों की बात होती है, तो परितोष त्रिपाठी का नाम अपने आप सामने आ जाता है। आज ‘टीवी के मामा जी’ के नाम से मशहूर परितोष त्रिपाठी अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। 6 फरवरी 1988 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में जन्मे परितोष का सफर किसी चमक-दमक से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, रंगमंच की धूल और लगातार संघर्ष से होकर गुजरा है।

पारितोष त्रिपाठी का जन्म (Paritosh Tripathi Birthday Special)

परितोष का परिवार मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के पटखौली गांव से ताल्लुक रखता है। पिता रमन त्रिपाठी एक स्कूल में HOD रहे, वहीं माता सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ कला की समझ उन्हें घर से ही मिली। शुरुआती शिक्षा बिहार के एक राजकीय विद्यालय से हुई और फिर सपनों को उड़ान देने के लिए वे दिल्ली पहुंचे, जहां शिवाजी कॉलेज से पढ़ाई की।

बचपन से एक्टर बनना चाहते थे पारितोष

अभिनय का कीड़ा परितोष के भीतर बचपन से ही था। थिएटर उनकी पहली मोहब्बत रहा। साल 2000 के आसपास उन्होंने देवरिया और गोरखपुर के थिएटर ग्रुप्स के साथ काम करना शुरू किया। वह दौर आसान नहीं था। रोज देवरिया से गोरखपुर का सफर, सीमित संसाधन और भविष्य की अनिश्चितता, लेकिन जिद सिर्फ एक थी, अभिनेता बनना। उनके दोस्त बताते हैं कि परितोष शाहरुख खान की मिमिक्री किया करते थे, जबकि उनके साथी अमिताभ बच्चन की नकल में माहिर थे। यही खेल-खेल में शुरू हुआ सफर आगे चलकर पहचान बन गया। पारितोष बताते हैं कि पहले ही दिन खूब मार पड़ी। इसके बाद लगातार पांच दिनों तक किश्तों में मार पड़ती रही। लेकिन बाद में परिवार ने उनकी अभिनय की दुनिया में जाने के निर्णय पर पूरा सपोर्ट दिया।

थिएटर किया करते थें पारितोष

कॉलेज के दिनों में परितोष ने अपना खुद का थिएटर ग्रुप ‘वयान थिएटर ग्रुप’ बनाया। इसी दौरान उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन किया, जिसे उन्होंने खुद लिखा और निर्देशित किया। इस प्रस्तुति के लिए उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों पुरस्कार मिला, जो उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ।

कब मिला टीवी पर ब्रेक?

टीवी पर पहला मौका उन्हें ईटीवी के शो ‘सलाम यूपी’ से मिला, लेकिन असली पहचान 2010 में महुआ टीवी के कॉमेडी शो ‘हंसी का तड़का’ से मिली, जिसे उन्होंने जीता। इसके बाद परितोष ने ‘ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा’, ‘पिया रंगरेज’, ‘महाकुंभ’ और कपिल शर्मा शो जैसे कई शोज में अभिनय किया। बतौर होस्ट ‘सुपर डांसर’ में उनकी मौजूदगी ने उन्हें घर-घर का चहेता बना दिया और यहीं से वो टीआरपी मामा कहलाने लगे।

फिल्मों में भी रखा कदम

फिल्मों में उन्होंने 2018 में ‘काशी इन सर्च फॉर गंगा’ से कदम रखा। अभिनय के साथ-साथ परितोष एक लेखक भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखीं और विज्ञापनों के लिए लेखन व अभिनय किया।

पारितोष का निजी जीवन

निजी जीवन की बात करें तो 10 दिसंबर 2022 को उन्होंने अपनी लंबे समय की साथी मीनाक्षी चंद से देहरादून में शादी की। मई 2025 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ, जिसकी खुशी उन्होंने खुद फैंस के साथ साझा की।

आज भी गोरखपुर को अपनी संघर्ष स्थली मानने वाले परितोष कहते हैं कि ये शहर उन्हें सुकून देता है। रंगमंच से टीवी और फिल्मों तक का उनका सफर इस बात की मिसाल है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो देवरिया की गलियों से निकलकर भी देशभर के दिलों में जगह बनाई जा सकती है।

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