अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए। वजह है ईरान के साथ युद्ध को लेकर बातचीत।
एक महीने से ज्यादा चली जंग को खत्म करने की कोशिश पाकिस्तान की राजधानी में होगी। यह पहली बड़ी कूटनीतिक बैठक होगी जो दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत की जमीन तैयार कर सकती है।
वेंस ने जाने से पहले ही सुना दिया
पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले वेंस ने पत्रकारों से बात की और दो बातें एक साथ कहीं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान नेकनीयती से बातचीत करना चाहता है तो अमेरिका खुले दिल से मिलने को तैयार है। लेकिन अगर ईरान ने चालाकी दिखाने की कोशिश की तो अमेरिकी टीम उसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं होगी।
अमेरिका का दल कौन-कौन है?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने बताया कि इस्लामाबाद जाने वाले अमेरिकी दल में तीन बड़े नाम हैं। वेंस के अलावा अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी इस टीम में शामिल हैं। यह टीम शनिवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार पहले दौर की बातचीत शुरू करेगी।
ईरान की तरफ से कौन आ रहा है?
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक तेहरान का प्रतिनिधित्व संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ करेंगे। जंग के दौरान इन्होंने ईरान की रणनीतिक जिम्मेदारियां संभाली हैं और इन्हें तेहरान के युद्धकालीन नेतृत्व का अहम चेहरा माना जाता है।
हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं की है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी पाकिस्तान पहुंचे हैं या नहीं। पाकिस्तानी मीडिया ने जरूर खबर दी है कि ईरानी दल इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
यह बातचीत इतनी अहम क्यों है?
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का तात्कालिक युद्धविराम पहले से लागू है। यह बातचीत उसी युद्धविराम को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया में चल रही एक महीने से ज्यादा की जंग को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम है।
दोनों तरफ से बड़े नाम आ रहे हैं, जगह तटस्थ है और वक्त नाजुक है। अगर यह बातचीत कामयाब रही तो एक पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।


