अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी की डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगैंडा बनकर रह गई:मेलानिया की फिल्म फ्लॉप, सिनेमाघरों में दर्शकों का टोटा, लंदन प्रीमियर में सिर्फ 1 टिकट बिका

अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी की डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगैंडा बनकर रह गई:मेलानिया की फिल्म फ्लॉप, सिनेमाघरों में दर्शकों का टोटा, लंदन प्रीमियर में सिर्फ 1 टिकट बिका

नमस्कार दर्शकों! अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प की डॉक्यूमेंट्री ‘मेलानिया: 20 डेज टू हिस्ट्री’ शुक्रवार को रिलीज हुई, लेकिन सिनेमाघरों में दर्शकों का टोटा रहा। हाइप के साथ पेश की गई इस फिल्म में जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने से ठीक 20 दिन पहले की जिंदगी दिखाई गई है। फिल्म को खुद मेलानिया ने को-प्रोड्यूस किया है। दावा किया, ‘हर कोई जानना चाहता है मेरी कहानी।’ लेकिन ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक हॉल खाली पड़े दिखे। लंदन में इसके प्रीमियर से पहले इस्लिंगटन के एक सिनेमाघर में दोपहर के समय की स्क्रीनिंग के लिए केवल एक टिकट बिका, जबकि उसी स्थान पर शाम के शो के लिए केवल दो टिकट ही बिके। प्रमुख मल्टीप्लेक्सों में स्थिति और भी निराशाजनक थी, लंदन के व्यू थिएटरों में निर्धारित सभी स्क्रीनिंग के लिए एडवांस बुकिंग शून्य रही। फिल्म को ब्रिटिश फिल्म वर्गीकरण बोर्ड द्वारा रिलीज के लिए मंजूरी मिलने, अमेरिका में बढ़चढ़कर प्रचार और वाइट हाउस में प्रीमियर के बावजूद दर्शक दूर रहे। ब्रिटेन की कॉलमनिस्ट व फिल्म समीक्षक जूडिथ वुड्स ने उत्तर लंदन के मॉल में सिनेमा देखी। उन्होंने कहा कि सिनेमाघर में उन्हें मिलाकर पांच दर्शक थे। इसमें एक महिला तो सिर्फ ठंड से बचने के लिए सिनेमाघर में आ गई थी। दर्शक क्यों नहीं आए
जूडिथ वुड्स की राय में ये डॉक्यूमेंट्री कम, उत्तर कोरिया स्टाइल प्रोपेगैंडा और ब्रांडिंग मुहिम ज्यादा है। ​फिल्म में मेलानिया की ठंडी मुस्कान, रात में डार्क सनग्लासेस पहनना, परफेक्ट ड्रेसिंग डरावनी लगी। कोई भावनाएं नहीं, सिर्फ दिखावा ही नजर आया। फिल्म पर 687 करोड़ रु. खर्च हुए
अमेजन ने इस फिल्म के राइट्स और मार्केटिंग पर करीब 687 करोड रु. खर्च किए हैं। इसमें मेलानिया के निजी जीवन की झलकें हैं, लेकिन कई पहलू नहीं दिखाए। जैसे- फर्स्ट लेडी की भूमिका पर असहजता जताई है, लेकिन राजनीतिक विचार छिपा लिए। फिल्म ऐसे समय आई है, आईसीई एजेंट द्वारा दो लोगाें की हत्या को लेकर अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे असंवेदनशीलता भी कहा जा रहा है।

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